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Al-Wala Wal-Bara: The Islamic Principle of Faith, Balance and Moral Responsibility
Image : Devbhoomi darshan ( Al-Wala Wal-Bara)

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Al wala wal bara: अल-वला वल-बरा क्या है? इस्लाम की संतुलित और रचनात्मक अवधारणा

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अल-वला वल-बरा: इस्लाम में निष्ठा, न्याय और मानवता का महत्वपूर्ण सिद्धांत (Islamic Concept of Al-Wala Wal-Bara)

|Islamic Concept of Al-Wala Wal-Bara|
इस्लाम को एक संपूर्ण जीवन पद्धति माना जाता है, जो केवल व्यक्ति के निजी जीवन और चरित्र निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और सामूहिक जीवन के लिए भी स्पष्ट सिद्धांत प्रस्तुत करता है। इन्हीं महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक है “अल-वला वल-बरा”, जिसे इस्लामी विचारधारा में ईमान की बुनियाद और मुस्लिम पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है। यह अवधारणा व्यक्ति को सत्य और असत्य, भलाई और बुराई तथा सही और गलत के बीच स्पष्ट अंतर करने की शिक्षा देती है।

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क्या है अल-वला वल-बरा? (Meaning of Al-Wala Wal-Bara)

इस्लामी शब्दावली में “अल-वला” का अर्थ प्रेम, निष्ठा, संबंध और समर्थन से है, जबकि “वल-बरा” का अर्थ विरक्ति, असहमति, दूरी और अस्वीकार करना है। इस सिद्धांत के अनुसार एक मुसलमान को अल्लाह, उसके रसूल और ईमान वालों के प्रति प्रेम और निष्ठा रखनी चाहिए, वहीं अत्याचार, फितना, अन्याय और बुराई से दूरी बनाए रखनी चाहिए। कुरआन और हदीसों में इस अवधारणा का कई स्थानों पर उल्लेख मिलता है, ताकि मुसलमान अपनी वैचारिक और व्यावहारिक जिंदगी में संतुलन और सत्यनिष्ठा बनाए रख सकें।

गलत व्याख्या से पैदा होते हैं भ्रम (Islam and Misconceptions)

इस्लामी विद्वानों का मानना है कि समय-समय पर कुछ लोगों ने अल-वला वल-बरा की अवधारणा को गलत तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे इसे कट्टरता, घृणा और सामाजिक अलगाव से जोड़कर देखा जाने लगा। हालांकि इस्लाम का मूल संदेश संतुलन, न्याय, करुणा और मानव कल्याण पर आधारित है। इस सिद्धांत का वास्तविक उद्देश्य सत्य का समर्थन करना और असत्य से दूरी बनाए रखना है, न कि समाज में वैमनस्य पैदा करना।

समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी पर जोर (Social Responsibility in Islam)

इस्लाम मुसलमानों को समाज और देश की उन्नति में सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा देता है। कुरआन में धरती पर भ्रष्टाचार न फैलाने और सुधार के प्रयास करने का आदेश दिया गया है। पैगम्बर मुहम्मद ने भी उस व्यक्ति को श्रेष्ठ बताया है, जो लोगों के लिए सबसे अधिक लाभदायक हो। इस संदर्भ में अल-वला वल-बरा यह संदेश देता है कि व्यक्ति अपनी निष्ठा को सत्य, न्याय, ईमानदारी और मानवता के साथ जोड़े तथा समाज में शांति, सहिष्णुता, भाईचारे और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका निभाए।

कानून का सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व (Peaceful Coexistence in Islam)

इस्लाम नागरिक कर्तव्यों पर भी विशेष बल देता है। इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार जिस देश में व्यक्ति रहता है, उसके कानूनों का सम्मान करना, उसकी अखंडता की रक्षा करना और उसके विकास में योगदान देना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी गई है, बशर्ते यह सब धर्म के मूल सिद्धांतों के विपरीत न हो। पैगम्बर मुहम्मद द्वारा मदीना में स्थापित समाज को विभिन्न धर्मों और समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का उदाहरण माना जाता है।

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बुराइयों से दूर रहने का संदेश (Avoiding Extremism and Corruption)

अल-वला वल-बरा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि व्यक्ति स्वयं को भ्रष्टाचार, झूठ, अत्याचार और उग्रवाद जैसी बुराइयों से दूर रखे। इस्लामी विचारधारा के अनुसार हर वह कार्य, जो व्यक्ति और समाज के लिए हानिकारक हो, उससे बचना आवश्यक है। साथ ही, इस्लाम में दावत और प्रचार का तरीका बुद्धिमत्ता, नरमी और अच्छे आचरण पर आधारित बताया गया है। कुरआन लोगों को बुद्धिमत्ता और उत्तम उपदेश के माध्यम से सही मार्ग की ओर बुलाने की शिक्षा देता है।

आधुनिक दौर में बढ़ी जिम्मेदारियां (Role of Muslims in Modern Society)

आज जब दुनिया अनेक सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक चुनौतियों का सामना कर रही है, तब मुसलमानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे अपने धर्म की सकारात्मक और संतुलित तस्वीर प्रस्तुत करें। शिक्षा, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय विकास में सक्रिय भागीदारी को भी इस्लामी मूल्यों का हिस्सा माना गया है। विद्वानों के अनुसार अल-वला वल-बरा की वास्तविक भावना यही है कि व्यक्ति अपने धार्मिक मूल्यों के प्रति निष्ठावान रहते हुए समाज और मानवता की भलाई में सकारात्मक योगदान दे।

(लेखक शहाबुद्दीन, दिल्ली के एक स्वतंत्र इस्लामिक विचारक और चिंतक हैं।)

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