उत्तराखण्ड हल्द्वानी
वन्देमातरम् के 150 वर्ष होने पर वैचारिक गोष्ठी करेगा अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखण्ड
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All India Sahitya Parishad Uttarakhand will organize an ideological seminar on Vande Mataram 150th year: वन्देमातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में वैचारिक गोष्ठी आयोजित करेगा अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड
All India Sahitya Parishad Uttarakhand will organize an ideological seminar on Vande Mataram 150th year: हल्द्वानी। राष्ट्रगीत ‘वन्देमातरम्’ के गौरवमयी 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, उत्तराखंड पूरे प्रदेश में भव्य वैचारिक कार्यक्रमों का आयोजन करने जा रहा है। परिषद के प्रदेश महामंत्री सौरभ पाण्डेय ने इस अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए संगठन की भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। ज्ञात हो कि परिषद द्वारा 28 फरवरी 2026 को हल्द्वानी में भव्य युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसे पद्मश्री डॉ माधुरी बर्थवाल और पद्मश्री कल्याण सिंह रावत द्वारा समाज में अग्रणीय कार्य कर रहे युवाओं को सम्मानित किया गया।
RSS का आनुषांगिक संगठन है परिषद:
उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का साहित्यिक क्षेत्र में कार्य करने वाला प्रमुख आनुषांगिक संगठन है। उत्तराखंड में परिषद की गतिविधियों और साहित्यिक चेतना को प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जगदीश पंत ‘कुमुद’ और प्रदेश महामंत्री सौरभ पाण्डेय के कुशल नेतृत्व में निरंतर गति प्रदान की जा रही है।
प्रत्येक जिले में जुटेगा विद्वानों का जमावड़ा:
प्रदेश महामंत्री सौरभ पाण्डेय ने बताया कि परिषद उत्तराखंड के सभी जनपदों में विशेष वैचारिक गोष्ठियों का आयोजन करेगी।
प्रमुख प्रतिभागी: इन गोष्ठियों में प्रदेश के प्रतिष्ठित विद्वान साहित्यकार, लेखक , राष्ट्रीय चिंतक, प्रोफेसर, विश्वविद्यालयों के शोधार्थी और विषय विशेषज्ञ शामिल होकर ‘वन्देमातरम्’ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पक्ष पर संवाद करेंगे।
संगठन विस्तार: परिषद जल्द ही प्रदेश के प्रत्येक जिले में अपनी सक्रिय कार्यकारिणी का विस्तार भी करेगी, ताकि प्रदेश के कोने-कोने तक साहित्यिक गतिविधियों का प्रसार हो सके।
प्रदेश महामंत्री का सख्त संदेश:
संगठन की मजबूती और सक्रियता पर जोर देते हुए प्रदेश महामंत्री ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट और कड़ा संदेश भी दिया।
“संगठन में रहना है तो संगठन और समाज का कार्य करना ही होगा। पद केवल दायित्व है, और इस दायित्व का निर्वहन धरातल पर कार्य करके ही किया जा सकता है।” — सौरभ पाण्डेय, प्रदेश महामंत्री
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