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Army jco suman Martyr ladakh avalanche: लद्दाख हिमस्खलन में जेसीओ सुमन शहीद
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Army JCO Suman Martyr Ladakh Avalanche: JCO Suman Kumar Singh of Nalanda, Bihar martyred.: ड्यूटी के दौरान बिहार का लाल शहीद, लद्दाख हिमस्खलन में गई जिंदगी, 14 वर्षीय बेटे ने दी पिता की चिता को मुखाग्नि…
Army JCO Suman Martyr Ladakh Avalanche: JCO Suman Kumar Singh of Nalanda, Bihar martyred.: समूचे देशवासियों के लिए लद्दाख से एक हृदय विदारक घटना की खबर सामने आ रही है, जहां पर तैनात बिहार के लाल जेसीओ सुमन कुमार सिंह उर्फ पंकज की हिमस्खलन की चपेट मे आने से जिंदगी चली गई। बताते चले यह हादसा उस दौरान घटित हुआ जब वो ड्यूटी पर तैनात थे। जवान की शहादत के बाद से उनके परिजनों में कोहराम मचा हुआ है वहीं पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार बिहार के नालंदा नूरसराय थाना क्षेत्र के मोकरमपुर मिर्चायगंज के निवासी 45 वर्षीय सुमन कुमार सिंह उर्फ( पंकज) पुत्र सुरेंद्र सिंह ,बीते 26 मार्च को लद्दाख में जेसीओ के पद पर अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। तभी इस दौरान अचानक से भीषण हिमस्खलन के कारण वह बर्फ के नीचे दब गए, इसके बाद सेना के बचाव दल ने उन्हे जैसे तैसे बर्फ से बाहर निकाला जिन्हे उपचार के लिए लखनऊ स्थित आर्मी अस्पताल ले जाया गया, जहां पर डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद बीते 27 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया।बताया जा रहा है कि करीब एक महीने से लखनऊ के अस्पताल में सुमन का उपचार चल रहा था, जो ब्लड कैंसर और पीलिया से जूझ रहे थे। वहीं हिमस्खलन मे दबने के कारण उनकी तबीयत और बिगड़ गई थी जिसके कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
14 साल के बेटे अंश ने अपने पिता की चिता को दी मुखाग्नि
बीते 27 मार्च को जैसे ही सुमन का पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा तो उनकी पत्नी पार्थिव शरीर से लिपटकर रोती रही, जबकि मासूम बच्चे अपने पिता के पार्थिव शव को एक टक निहारते रहे। इसके बाद सुमन के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक घाट ले जाया गया, जहां पर उनके 14 साल के बेटे अंश ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दृश्य को देखकर हर किसी की आंखें भर आई ,वहीं ग्रामीणों ने शहीद सुमन कुमार अमर रहे और भारत माता की जय के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सैन्य परिवार से ताल्लुक रखते थे सुमन
बताते चले सुमन अपने परिवार के मुख्य स्तम्भ थे जो दो भाइयों में बड़े थे। सुमन के छोटे भाई भी देश सेवा कर रहे है और वर्तमान में CISF में कार्यरत है। शहीद अपने पीछे अपनी पत्नी दो बेटियों और दो बेटों को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। सुमन की बड़ी बेटी (17) साल की है जो इंटर मे पढ़ रही है और छोटी बेटी मैट्रिक मे है जो (16) साल की है। शहीद के 2 बेटे अभी (13-14 साल के हैं। पिता की शहादत की खबर सुनते ही बच्चों को गहरा आघात पहुँचा।
