उत्तराखण्ड काव्य संकलन
गढ़वाली कविता- “खूबसूरती कु जिक्र जब होंदु……” संगीता महर (काव्य संकलन देवभूमि दर्शन)
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गढ़वाली कविता- खूबसूरती कु जिक्र जब होंदु….Sangeeta Mehar poem
खूबसूरती कु जिक्र जब होंदु,
त सबसी अगनै मेरु पहाड़ रौंदु,
तै शहर म, साधन त बहुत छन ,
पर अपरा पहाड़ की बात ही च कुछ यन,
की भैजी नौ सुणिक ही बसदु यक मन,
खूबसूरती कु जिक्र जब होंदु,
त सबसी अगनै मेरु पहाड़ रौंदु,
घुघुति हिलांश की चहक यख,
बांज बुराँश कि ठंड म जख, लगदू होलू भुला,भलु त्वे तै सु शहर तक,
मेरा त मन बसि च, मेरा पहाड़ कि महक,
खूबसूरती कु जिक्र जब होंदु,
त सबसी अगनै मेरु पहाड़ रौंदु,
सौभाग्य छै तू,जन्मी ये पहाड़ मा, पली बढ़ी तू, देवी देवतों की छांव मा,
कुछ पलायन अर, कुछ यूं नेताओं न ख्वे याली यू पहाड़ हां,
नितर आज भी च जिक्र येकु, शेर की दहाड़ मा,
खूबसूरती कु जिक्र जब होंदु,
त सबसी अगनै मेरु पहाड़ रौंदु,
देवी देवता यख पूज्य छन,
दादा दादी मा बस्यूं मन,
मजबूर ह्वे तै छोडि होलू त्वेन सु घर
नितर आज भी यखी बस्युं होलु तेरू मन,
ऐगी फिर बसन्त बौडी,
फुल्हारी छोरा भी ऐगी दौड़ी,
दीदी भुल्यों मा धय लगणी च
भैजी कना छन हल कि तयारी,
हरि सार(खेत) म भलि लगणी च
तौं द्वी हीरा मोतियों कि जोड़ी,
खूबसूरती कु जिक्र जब होंदु,
त सबसी अगनै मेरु पहाड़ रौंदु।।
रचना- संगीता महर, टिहरी गढ़वाल (उत्तराखण्ड)
Sangeeta Mehar poem
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