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Dharmendra Pradhan Biography: कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान कितनी हैं संपत्ति जानें राजनीतिक सफर
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Dharmendra Pradhan Resign Dharmendra Pradhan BJP Dharmendra Pradhan Education minister कभी पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरे थे धर्मेंद्र प्रधान, 29 साल बाद परीक्षा विवाद के बीच छोड़ी शिक्षा मंत्री की कुर्सी
Dharmendra Pradhan Biography: Dharmendra Pradhan BJP NEET paper leak protest resign net worth political journey uttarakhand breaking news live today: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है, जब देश में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और कथित पेपर लीक को लेकर छात्रों का विरोध तेज था। NEET-UG विवाद के साथ अन्य परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर भी केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर लगातार जवाबदेही का दबाव बना हुआ था। प्रधान ने अपने इस्तीफे का फैसला छात्रों के भविष्य और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक अतीत है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, करीब तीन दशक पहले छात्र नेता के रूप में वह परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में आंदोलन का हिस्सा रहे थे। अब वर्षों बाद शिक्षा मंत्री के तौर पर उन्हें खुद परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों और छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा।
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छात्र आंदोलन से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर (Dharmendra Pradhan Student Politics)
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ था। उनका परिवार राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनके पिता डॉ. देबेंद्र प्रधान ओडिशा में भाजपा के शुरुआती नेताओं में शामिल रहे हैं। उनकी माता का नाम बसंत मंजरी प्रधान है। धर्मेंद्र प्रधान का विवाह मृदुला ठाकुर प्रधान से हुआ और दोनों के दो बच्चे हैं। उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय के वाणी विहार से मानव विज्ञान में एमए की पढ़ाई की। छात्र जीवन के दौरान ही वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई।
1997 में पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन का दावा (Dharmendra Pradhan neet Paper Leak Protest)
धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक सफर का एक अहम पड़ाव वर्ष 1997 बताया जाता है। उस समय वह ABVP के राष्ट्रीय सचिव थे। रिपोर्टों के अनुसार, ओडिशा में कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में उन्होंने भुवनेश्वर में छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था।प्रदर्शन में शामिल रहे प्रशांत राउत के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, जुलाई 1997 के तीसरे सप्ताह में प्रधान के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने 12वीं के प्रश्नपत्र लीक के विरोध में ओडिशा विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया था। उस दौर में लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं के कारण छात्र समुदाय में व्यापक नाराजगी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स ने लाठीचार्ज किया, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान और प्रशांत राउत समेत 64 कार्यकर्ता घायल हुए थे। हालांकि, इस ऐतिहासिक घटना के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। करीब 29 साल बाद परिस्थितियां बदल गईं। वही धर्मेंद्र प्रधान, जो छात्र राजनीति के दौरान परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाते थे, शिक्षा मंत्री रहते हुए NEET-UG और अन्य परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बीच राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे थे।
ABVP से भाजपा तक ऐसे बढ़ा राजनीतिक कद (Dharmendra Pradhan Political Career)
ABVP के बाद धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के युवा संगठन में सक्रिय हुए और धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई।
– वर्ष 2000 में वह पहली बार ओडिशा विधानसभा के सदस्य चुने गए।
– 2001 में उन्हें ओडिशा भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया।
– 2002 में वह भाजपा के राष्ट्रीय सचिव बने।
– 2004 में उन्होंने भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
– इसी वर्ष वह ओडिशा के देवगढ़ लोकसभा क्षेत्र से पहली बार सांसद चुने गए।
– 2009 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी पार्टी ने उन्हें संगठन विस्तार की जिम्मेदारियां दीं।
– 2012 में वह राज्यसभा पहुंचे।
– जून 2024 में वह 18वीं लोकसभा के लिए दोबारा सांसद चुने गए।
मोदी सरकार में पेट्रोलियम मंत्री के तौर पर लंबी पारी (Dharmendra Pradhan Petroleum Ministry)
2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने करीब सात वर्षों तक इस मंत्रालय का नेतृत्व किया और देश के लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले मंत्रियों में शामिल रहे। उनके कार्यकाल की प्रमुख पहलों में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इस योजना के तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, गैस बुनियादी ढांचे के विस्तार और देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े सुधारों पर भी जोर दिया गया।
ओडिशा में भाजपा के विस्तार के प्रमुख रणनीतिकारों में रहे (Dharmendra Pradhan Odisha BJP)
धर्मेंद्र प्रधान को ओडिशा में भाजपा के संगठन विस्तार के प्रमुख रणनीतिकारों में गिना जाता है। लंबे समय तक उन्होंने राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए काम किया। वर्ष 2024 में ओडिशा में भाजपा की सरकार बनने को उनकी राजनीतिक रणनीति की बड़ी उपलब्धियों में गिना गया। राज्य में पार्टी के बढ़ते प्रभाव के पीछे प्रधान की संगठनात्मक भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया।
2021 में मिली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी (Dharmendra Pradhan Education Minister)
7 जुलाई 2021 को धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के साथ कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया गया। उन्होंने स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों की निगरानी की। शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और तकनीकी सुधारों पर भी जोर दिया गया। लेकिन उनके कार्यकाल का दूसरा पहलू विवादों से जुड़ा रहा।
NEET-UG से UGC-NET तक विवादों ने बढ़ाई मुश्किलें (Dharmendra Pradhan Exam Controversy)
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे। इनमें NEET-UG परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और अनियमितताओं का विवाद सबसे बड़ा रहा। इसके अलावा UGC-NET परीक्षा रद्द किए जाने और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के आरोपों ने भी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बहस तेज की। छात्रों और विपक्षी दलों की ओर से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और जिम्मेदारी तय करने की मांग लगातार उठती रही।
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छात्रों के विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच इस्तीफा (Dharmendra Pradhan Resignation)
NEET-UG विवाद को लेकर छात्रों का विरोध लंबे समय तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री की जवाबदेही भी शामिल रही। विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए परीक्षा प्रणाली को लेकर जवाब मांगा। इसी बीच 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे के संदेश में उन्होंने छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देने की बात कही और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में वह नहीं चाहते कि देश के युवा लंबे राजनीतिक और कानूनी विवादों में उलझें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार भी जताया। इस इस्तीफे को परीक्षा विवाद से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हालांकि, अब असली चुनौती परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बहाल करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुधार लागू करने की होगी।
कितनी संपत्ति के मालिक हैं धर्मेंद्र प्रधान? (Dharmendra Pradhan Net Worth)
आपके उपलब्ध 2024 के चुनावी हलफनामे से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान और उनके परिवार की कुल संपत्ति करीब ₹6.38 करोड़ बताई गई है। व्यक्तिगत तौर पर उनके पास लगभग ₹1.39 करोड़ की चल संपत्ति और ₹92 लाख की अचल संपत्ति दर्ज है। उन पर करीब ₹32 लाख की देनदारी भी बताई गई है। वित्त वर्ष 2022-23 में उनकी वार्षिक आय करीब ₹12.74 लाख बताई गई थी। उनकी पत्नी मृदुला ठाकुर प्रधान के पास करीब ₹2.95 करोड़ की चल संपत्ति और ₹1.37 करोड़ की अचल संपत्ति बताई गई है। उनके नाम करीब ₹20 लाख की देनदारी दर्ज होने की जानकारी है, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में उनकी सालाना आय करीब ₹49 लाख बताई गई। परिवार की संपत्ति के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बेटी नैमिषा की कुल संपत्ति करीब ₹25 लाख और वार्षिक आय ₹4.6 लाख बताई गई है। वहीं बेटे निशांत प्रधान की संपत्ति करीब ₹1.62 लाख दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इस तरह धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर छात्र आंदोलन से शुरू होकर केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों तक पहुंचा और अब शिक्षा मंत्रालय से उनके इस्तीफे के साथ एक नया अध्याय सामने आया है। परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच उनका पद छोड़ना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन देश के लाखों छात्रों के लिए इससे भी बड़ा सवाल यही है कि परीक्षा प्रणाली में भरोसा दोबारा कैसे कायम होगा।
