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चलमोड़ीगाड़ा-कलौटा मोटरमार्ग पर दर्ज याचिका उत्तराखंड हाईकोर्ट में खारिज,सड़क निर्माण का रास्ता साफ

Almora Chalmodigada kalota motorway: विवादित चलमोड़ीगाड़ा-कलौटा मोटरमार्ग पर दर्ज दूसरी याचिका भी उत्तराखंड हाईकोर्ट में खारिज,सड़क निर्माण का रास्ता हुआ साफ

दशकों से लंबित अल्मोड़ा जिले के धौलादेवी विकासखंड के अंतर्गत “चलमोड़ीगाड़ा-कलौटा” मोटर मार्ग (Almora Chalmodigada kalota motorway) पर दायर दूसरी याचिका के उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा खारिज कर दिए जाने के बाद अब इस मोटरमार्ग के निर्माण की सारी बाधायें दूर हो चुकी हैं।जिला अल्मोड़ा की पब्लिक एशोसिएशन समिति के सदस्य मदन मोहन ने देवभूमि दर्शन के साथ जानकारी साझा करते हुए बताया की काफी लम्बे वक्त से विवादित इस मोटरमार्ग पर वर्तमान में टेंडर से जुड़े एक नए विवाद के साथ उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी। चूंकि इससे पूर्व में भी इस सड़क मार्ग को लेकर टेंडर में धांधली का एक मुकदमा दायर हुआ था,जिस पर कोर्ट में ग्रामीणों के वकील के हस्तक्षेप और कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने उसे 6 अगस्त 2019 को खारिज कर दिया था। उससे पूर्व ही सड़क के दोनों चरणों की PMGSY से भी स्वीकृति हो चुकी थी तथा राज्य सरकार के नियमानुसार इस सड़क को लोकनिर्माण विभाग से PMGSY को ट्रांसफर कर नए सिरे से टेंडरिंग की प्रकिया शुरू हुई।लेकिन PWD से टेंडर आवंटन में फाईनल किये ठेकेदार के द्वारा गाँव की सड़क को PMGSY के द्वारा फिर से नए टेंडरिंग कराये जाने के विभागीय फैसले का विरोध करते हुऐे इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी। जिस पर कोर्ट ने सुनवाई पूरा होने तक विभाग द्वारा सड़क निर्माण के किसी भी अंतिम फैसले पर रोक लगा दी थी। सड़क को कोर्ट में दोबारा धकेले जाने से नाराज ग्रामीणों ने फिर से उत्तराखण्ड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 11 दिसम्बर 2019 को ग्रामीणों की समिति ने अपने अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय के माध्यम से हाईकोर्ट में इस मामले के शीघ्र निपटारे हेतु अपनी इम्प्लीडमेंट एप्लीकेशन दायर की,जिसमें सुनवाई के बाद ग्रामीणों की दरख्वास्त न्ययालय के द्वारा स्वीकार कर ली गयी। विभाग द्वारा टेंडर की सम्पूर्ण कानूनी प्रकिया पूर्ण होने के बाबजूद न्यायालय में सुनवाई शुरू ना होने कारण ग्रामीणों के अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय ने पुनः उत्तराखण्ड हाईकोर्ट में 19 जून 2020 को एक मोडिफिकेशन एप्लीकेशन लगाकर हाईकोर्ट से 15 नवम्बर 2019 के अपने पूर्व के आदेशों को परिवर्तित कर त्वरित सुनवाई की गुहार लगाई।जिसके बाद इस मामले में न्ययालय के द्वारा लगातार सुनवाई चल रही थी।बीते बृहस्पतिवार 23 जुलाई को सभी पक्षों की दलील और वकीलों की बहस सुनने के बाद माननीय हाईकोर्ट ने उक्त याचिका को खारिज कर PMGSY द्वारा दिनाँक 4 अक्टूबर 2019 को कि गई निविदा को बैध ठहराते हुये श्री सतीश चंद्र पांडेय द्वारा दायर याचिका को ख़ारिज कर दिया।कोर्ट के फैसले के बाद इस सड़क से जुड़े सभी ग्रामीणों में एक बार फिर से खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।

अवगत हो कि चलमोड़ीगाड़ा-कलौटा मोटरमार्ग के विवादों का एक बेहद ही लंबा इतिहास रहा है। इससे पूर्व में यह तब सुर्खियों में आया था,जब क्षेत्र के आधे दर्जन ग्रामप्रधानों के एक ग्रुप ने उनके पक्ष के ठेकेदार को ठेका ना मिलने की आशंका को देखते हुये सड़क की निविदा पर आपत्ति उठाते हुये एक सामूहिक मेजरनामा लोकनिर्माण विभाग में लगा दिया था।उसके बाद फिर नये सिरे से टेडरिंग हुई थी जो फिर विवादों में उलझ गयी और निविदा से जुड़े एक ठेकेदार ने टेडरिंग में धांधली का आरोप लगाकर निविदा को हाईकोर्ट में चुनौती देकर सड़क को कोर्ट में धकेल दिया था।सड़क को न्यायालय में धकेलेजाने से नाराज ग्रामीणों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।उसके बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान ठेकेदार की याचिका को आधारहीन बताते हुये उसे खारिज कर दिया था। फिलहाल ग्रामीण अब ठेकेदारों से जुड़े तीसरे विवाद से जूझ रहे थे।कोर्ट के फैसले के बाद कमेटी चेयरमैन एवं ग्रामीणों के अधिवक्ता मदन-मोहन पाण्डेय,कमेटी के प्रबंध निदेशक तथा इस केस में सहयोगी रहे अधिवक्ता पूरन सिंह बिष्ट,कार्यकारी निदेशक मोहन चंद्र उपाध्याय,अध्यक्ष केशवदत्त जोशी,सँयुक्त निदेशक भूवन उपाध्याय,प्रेस सचिव तारा चंद्र शर्मा समेत कमेटी के सभी पदाधिकारियों का क्षेत्र की आम जनता के द्वारा धन्यवाद प्रकट किया गया।

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