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Nikita RBSE Result 2026: राजस्थान बोर्ड 12वीं की टॉपर बनी निकिता लेकिन हार गई जिंदगी की जंग
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Nikita RBSE Result 2026: Nikita became the topper of Rajasthan Board 12th but died before result RBSE Result 2026: 93.88% अंक लाने वाली निकिता नहीं रही, रिजल्ट के दिन घर में पसरा मातम
Nikita RBSE Result 2026: Nikita became the topper of Rajasthan Board 12th but died before result बीते मंगलवार को घोषित राजस्थान बोर्ड के परीक्षा परिणाम जहां लाखों घरों में खुशियां लेकर आए, वहीं श्रीगंगानगर जिले के एक परिवार के लिए यही दिन गहरे दुख का कारण बन गया। दरअसल 12वीं में शानदार अंक हासिल करने वाली एक होनहार छात्रा इस सफलता को देखने के लिए इस दुनिया में नहीं रही। रिजल्ट से ठीक 11 दिन पहले गंभीर बीमारी के चलते बीते 20 मार्च को उसकी मौत हो गई।
रिजल्ट से पहले ही थम गई जिंदगी RBSE 12th Result 2026
अभी तक मिल रही जानकारी के मुताबिक राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित 12वीं के परिणाम में निकिता ने 93.88 प्रतिशत अंक हासिल किए। 7 केएनडी के सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल की छात्रा निकिता ने कला वर्ग में अपनी कामयाबी का लोहा मनवाया था, लेकिन यह उपलब्धि उस समय सामने आई, जब 20 मार्च को ही बीमारी के चलते उसकी मौत हो चुकी थी। नतीजों से महज 10 दिन पहले जिंदगी की जंग हार जाने वाली इस छात्रा की कहानी हर किसी को भावुक कर रही है।
बीमारी से जूझते हुए भी नहीं छोड़ी पढ़ाई rajsthan board result 2026
श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र के 7 केएनडी गांव निवासी निकिता लंबे समय से हेपेटाइटिस और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ रही थी। इसके बावजूद उसने अपनी पढ़ाई में कभी ढील नहीं दी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी—माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते थे, लेकिन बेटी के सपनों में कोई कमी नहीं थी।
रिजल्ट आया, लेकिन खुशियां नहीं लौटीं
जब 31 मार्च को परिणाम घोषित हुआ और निकिता के शानदार अंक सामने आए, तो घर में खुशी के बजाय सन्नाटा छा गया। मां-बाप की आंखों में गर्व जरूर था, लेकिन उस गर्व के साथ ऐसा दर्द भी था जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। जिस बेटी के लिए यह दिन सबसे खास होना था, वही इस पल को देखने के लिए मौजूद नहीं थी।
शिक्षकों और गांव को भी है गर्व, पर दिल भारी
निकिता के स्कूल के शिक्षकों ने उसे एक अनुशासित और मेहनती छात्रा बताया। पढ़ाई के प्रति उसका समर्पण ही उसके परिणाम में झलकता है। गांव के लोग भी उसकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं, लेकिन उसकी कमी हर किसी को खल रही है।
परिवार के सपनों को अधूरा छोड़ गई निकिता
पिता अपनी बेटी को ऊंचे पद पर देखना चाहते थे। निकिता खुद भी आगे पढ़ाई कर परिवार की हालत सुधारने का सपना देख रही थी। लेकिन बीमारी ने उसके सभी अरमान अधूरे छोड़ दिए।
गांव में यादों को जिंदा रखने की पहल, बनाएंगे लाइब्रेरी
स्थानीय लोगों ने निकिता की याद में गांव में बनने वाली लाइब्रेरी का नाम उसके नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उसकी मेहनत और संघर्ष से प्रेरणा ले सकें।
खुशी और दर्द का संगम
इस बार का बोर्ड रिजल्ट एक ओर जहां सफलता की कहानियां लेकर आया, वहीं निकिता की कहानी यह भी याद दिलाती है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। उसने अपना वादा तो निभाया—परिणाम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके—लेकिन उसे देखने के लिए वह खुद मौजूद नहीं रही।
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