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Rishikesh bajrang setu fee: ऋषिकेश बजरंग सेतु पर नहीं मिलेगी फ्री एंट्री देना होगा किराया
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Bajrang setu rishikesh lakshman jhula entry fee uttarakhand news today ऋषिकेश के बजरंग सेतु पर अब हर जगह नहीं मिलेगी एंट्री! कांच के फुटपाथ पर चलने के लिए देना पड़ सकता है शुल्क, कांवड़ यात्रा में रहेगा बंद
Rishikesh Bajrang Setu Fee: now no free entry to Rishikesh Bajrang Setu lakshman jhula toll/fee will have to be paid. Uttarakhand breaking news live today: उत्तराखण्ड की तीर्थनगरी ऋषिकेश में गंगा के ऊपर तैयार किया गया बजरंग सेतु अब केवल आवागमन का नया विकल्प नहीं, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी एक खास आकर्षण बनने जा रहा है। लक्ष्मण झूला के विकल्प के तौर पर बनाए गए इस आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज के संचालन और सुरक्षा को लेकर अब विस्तृत SOP (Standard Operating Procedure) तैयार की जा रही है। इसके तहत पुल के अलग-अलग हिस्सों के इस्तेमाल, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा, निगरानी तथा रखरखाव को लेकर स्पष्ट नियम तय किए जाएंगे।सबसे अहम बात यह है कि पुल का सामान्य हिस्सा आम लोगों की आवाजाही के लिए खुला रहेगा, लेकिन दोनों ओर बनाए गए कांच के विशेष फुटपाथ पर जाने के लिए भविष्य में शुल्क लिया जा सकता है। वहीं, कांवड़ यात्रा के दौरान इस पारदर्शी कांच वाले हिस्से को पूरी तरह बंद रखने की तैयारी है। यानी कांवड़ियों को पुल के सामान्य हिस्से से गुजरने की अनुमति होगी, लेकिन कांच के फुटपाथ पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
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कांच के फुटपाथ पर चलने के लिए लग सकता है टिकट (rishikesh Glass bridge Walkway Ticket)
बजरंग सेतु के दोनों किनारों पर बनाए गए कांच के पैदल मार्ग को पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण के रूप में विकसित किया गया है। गंगा के ऊपर पारदर्शी रास्ते से गुजरते हुए नीचे बहती नदी और आसपास की पहाड़ियों का नजारा देखने का अनुभव इस पुल को सामान्य पुलों से अलग बनाता है। अब इस हिस्से में प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए शुल्क व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो सामान्य मार्ग से गुजरने वाले लोगों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा, जबकि कांच के फुटपाथ का अनुभव लेने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को निर्धारित शुल्क चुकाना पड़ सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि कांच वाले हिस्से पर एक समय में मौजूद लोगों की संख्या नियंत्रित करना और उसके रखरखाव का खर्च जुटाना भी है।
कांवड़ यात्रा में बंद रहेगा कांच वाला रास्ता (bajarang setu Kanwar Yatra Restrictions)
कांवड़ यात्रा के दौरान बजरंग सेतु के कांच वाले फुटपाथ को पूरी तरह बंद रखने की तैयारी की जा रही है। सावन में हरिद्वार और ऋषिकेश की ओर बड़ी संख्या में कांवड़िये पहुंचते हैं और इस दौरान पैदल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में पुल के कांच वाले हिस्से पर अतिरिक्त दबाव पड़ने और भीड़ को नियंत्रित करने में कठिनाई की आशंका को देखते हुए इसे कांवड़ यात्रा के दौरान प्रतिबंधित रखा जाएगा। श्रद्धालु और कांवड़िये पुल के सामान्य हिस्से का इस्तेमाल कर सकेंगे, लेकिन कांच के पैदल मार्ग पर प्रवेश नहीं मिलेगा।
132.30 मीटर लंबा है बजरंग सेतु, पांच परतों वाले टफेंड ग्लास का इस्तेमाल (lakshman jhula rishikesh Suspension Bridge)
करीब 69.20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया बजरंग सेतु लगभग 132.30 मीटर लंबा और करीब 8.60 मीटर चौड़ा है। इसे आधुनिक तकनीक के आधार पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आवाजाही के साथ-साथ पर्यटन का नया केंद्र भी बन सके। पुल के दोनों ओर पैदल यात्रियों के लिए कांच के फुटपाथ बनाए गए हैं। इनमें सामान्य कांच के बजाय पांच परतों वाले टफेंड ग्लास (Toughened Glass) का इस्तेमाल किया गया है। प्रत्येक परत करीब 12 मिलीमीटर मोटी है और सभी परतों को मिलाकर कांच की कुल मोटाई लगभग 60 मिलीमीटर तक है। पुल का सामान्य हिस्सा नियमित आवाजाही के लिए इस्तेमाल होगा, जबकि कांच का मार्ग पर्यटकों को गंगा के ऊपर से गुजरने का अलग अनुभव देगा।
निर्माण के दौरान कई बार क्षतिग्रस्त हुआ कांच, सुरक्षा बनी चुनौती (rishikesh bajarang setu lakshman jhula Glass bridge Safety)
बजरंग सेतु के कांच वाले हिस्से को लेकर सुरक्षा और निगरानी की चिंता भी सामने आती रही है। इस साल अप्रैल में पुल के एक छोर पर लगे कांच की ऊपरी परत क्षतिग्रस्त होने की तस्वीरें सामने आई थीं। हालांकि नीचे की चार परतें सुरक्षित बताई गई थीं। इससे पहले जनवरी में निर्माण कार्य के दौरान एक कर्मचारी के हाथ से हथौड़ा गिरने के कारण भी कांच को नुकसान पहुंचा था। बाद में उसे ठीक कर दिया गया। इसके बाद मई 2026 में भी बजरंग सेतु के कांच को नुकसान पहुंचने की सूचना सामने आई। लगातार सामने आई इन घटनाओं के बाद पुल पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था मजबूत करने और पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस की गई है। कांच वाले हिस्से की नियमित जांच, निगरानी और समय पर रखरखाव अब विभाग के लिए बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।
SOP में तय होंगे प्रवेश से लेकर रखरखाव तक के नियम (rishikesh News Today SOP Guidelines)
लोक निर्माण विभाग अब बजरंग सेतु के संचालन को स्पष्ट मानकों के तहत लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित SOP में यह तय किया जाएगा कि कांच वाले हिस्से में एक समय में कितने लोगों को प्रवेश दिया जा सकेगा, वहां किस तरह की निगरानी रखी जाएगी और कांच के रखरखाव की जिम्मेदारी किस प्रकार तय होगी। इसके साथ ही कांच वाले फुटपाथ के रखरखाव और संचालन पर होने वाले खर्च की व्यवस्था को लेकर भी नियम बनाए जाएंगे। पुल के किनारों को सुरक्षित करने के लिए उन्हें ऊंचा करने जैसे जरूरी कार्य भी किए गए हैं। लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे के अनुसार, दुनिया के कई देशों में इस तरह के पर्यटन आकर्षण वाले कांच के पुलों पर प्रवेश के लिए टिकट व्यवस्था लागू है। इससे एक ओर भीड़ को नियंत्रित किया जाता है, वहीं दूसरी ओर रखरखाव और संचालन की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
लक्ष्मण झूला बंद होने के बाद महसूस हुई नए पुल की जरूरत (Laxman Jhula Alternative)
बजरंग सेतु के निर्माण की कहानी पुराने लक्ष्मण झूला पुल से जुड़ी है। करीब 90 साल पुराने लक्ष्मण झूला को सुरक्षा कारणों के चलते पैदल आवाजाही के लिए बंद किए जाने के बाद श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के सामने आवागमन का बड़ा विकल्प सीमित हो गया था। इसी जरूरत को देखते हुए आधुनिक तकनीक से नए पुल के निर्माण की योजना तैयार की गई। बजरंग सेतु का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ और परियोजना की अनुमानित लागत करीब 69.20 करोड़ रुपये रखी गई। वर्ष 2023 में निर्माण कार्य का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा पूरा होने की जानकारी सामने आई थी और जुलाई 2023 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि परियोजना को पूरा होने में अपेक्षा से अधिक समय लगा और निर्माण कार्य लंबे समय तक जारी रहा। अब तैयार हो चुका यह पुल केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं, बल्कि ऋषिकेश के पर्यटन मानचित्र पर एक नए आकर्षण के रूप में भी देखा जा रहा है। यहां से गुजरने वाले पर्यटक गंगा और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र का विहंगम दृश्य देख सकेंगे।
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पर्यटन और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगी बड़ी चुनौती (rishikesh Tourism and Safety)
बजरंग सेतु के कांच वाले हिस्से को आकर्षण का केंद्र बनाने के साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी जरूरी होगा। अधिक भीड़ को नियंत्रित करना, एक समय में सीमित संख्या में लोगों को प्रवेश देना, कांच की नियमित जांच करना और नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं पर रोक लगाना विभाग के सामने प्रमुख चुनौती होगी। विशेष रूप से कांवड़ यात्रा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए कांच वाले हिस्से को बंद रखने की व्यवस्था इसी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अब विभाग की योजना है कि बजरंग सेतु का संचालन तय SOP के अनुसार किया जाए। सामान्य मार्ग पर आवाजाही सुचारू रहेगी, जबकि कांच वाले फुटपाथ के लिए अलग नियम लागू होंगे। संभावित टिकट व्यवस्था से भीड़ को नियंत्रित करने के साथ इसके रखरखाव का खर्च जुटाने की कोशिश की जाएगी।
इस तरह आने वाले समय में ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बजरंग सेतु पर गंगा के ऊपर बने पारदर्शी रास्ते से गुजरने का अनोखा अनुभव मिल सकता है, लेकिन इसके लिए उन्हें निर्धारित शुल्क देना पड़ सकता है। वहीं, कांवड़ यात्रा के दौरान इस आकर्षक कांच वाले मार्ग पर प्रवेश पूरी तरह बंद रखने की तैयारी है।
