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Almora news: अल्मोड़ा गुलदार के सामने ढाल बनी गीता, मौत के मुंह से खींच लाई पिता को
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Uttarakhand Almora guldar attack news Geeta became a shield on her father: गुलदार के सामने ढाल बनी बेटी, मौत के जबड़े से पिता को खींच लाई पहाड़ की हिम्मती गीता
Uttarakhand Almora guldar attack news Geeta became a shield on her father: उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव वन्य जीव संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन जंगली जानवरों के हमले में ग्रामीणों के जान गंवाने की खबरें सुनने को मिल रही है तो यदा कदा कुछ ऐसी भी खबरें सुनने को मिलती जहां साहस एवं सूझबूझ से पहाड़ के वाशिंदे जंगली जानवरों का डटकर मुकाबला कर अपनी और अपने परिजनों की जान बचा लेते हैं।
ऐसी ही एक साहसिक खबर आज राज्य के अल्मोड़ा जिले से सामने आ रही है, जहां एक बहादुर बेटी गीता ने अपनी सूझबूझ और साहस से गुलदार के जबड़े में फंसे पिता की जान बचा ली। हालांकि इस हमले में गीता के पिता गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। देर रात घटित इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
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घर के भीतर सौ रहे थे, कुत्तों के भौंकने की आवाज पर आए बाहर, देखते ही गुलदार ने कर दिया हमला Geeta almora guldar attack news
अभी तक मिल रही जानकारी के मुताबिक यह पूरी घटना गुरुवार रात करीब एक बजे की है। दरअसल मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया विकासखण्ड क्षेत्र के भटकोट गांव निवासी 61 वर्षीय चंदन राम केशर इन दिनों बैराठ क्षेत्र के रतनपुर में किराये के मकान में पत्नी और पुत्री के साथ रह रहे थे।
बताया गया है कि मकान का मुख्य द्वार बंद था और दूसरी मंजिल के बरामदे में कुत्ते बंधे हुए थे। रात के सन्नाटे में अचानक कुत्तों के तेज भौंकने की आवाज गूंजने लगी। इसी दौरान गुलदार छत के रास्ते मकान में घुस आया और सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए बरामदे तक पहुंच गया। कुत्तों के शोर से सतर्क हुए चंदन राम जैसे ही कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर आए, घात लगाए गुलदार ने उन पर झपट्टा मार दिया।
गुलदार ने चंदन राम को जबड़े में दबोच लिया और उन्हें घसीटते हुए सीढ़ियों के रास्ते नीचे ले जाने लगा। इसी बीच चीख-पुकार सुनकर उनकी 24 वर्षीय पुत्री गीता देवी कमरे से बाहर दौड़ी। सामने पिता को गुलदार के मुंह में देख उसने शोर मचाया, जिससे मकान में रहने वाले अन्य लोग भी जाग गए। इस विषम परिस्थितियों में जहां लोग अपना धैर्य तक खो देते है वहीं गीता ने साहस एवं सूझबूझ का परिचय दिया।
दरअसल हालात की गंभीरता को समझते हुए गीता ने पल भर की भी हिचक नहीं दिखाई। वह पीछे से गुलदार पर झपट पड़ी और पूरी ताकत से वार कर दिया। अचानक हुए हमले और शोरगुल से घबराया गुलदार चंदन राम को छोड़कर सीढ़ियों के रास्ते छत पर चढ़ा और जंगल की ओर भाग गया।
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गंभीर रूप से घायल हुए चंदन हायर सेंटर रेफर uttarakhand guldar attack news today
इस हमले में चंदन राम के गर्दन, सिर और चेहरे पर दांत व नाखूनों के गहरे घाव हो गए। वह बुरी तरह लहूलुहान हो चुके थे। रात करीब दो बजे उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौखुटिया पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के साथ उनके घावों में 35 टांके लगाए। स्थिति गंभीर होने के कारण शुक्रवार को उन्हें हायर सेंटर बेस अस्पताल अल्मोड़ा रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग भी सक्रिय हुआ। वन क्षेत्राधिकारी गोपाल दत्त जोशी और रेंज अधिकारी विक्रम सिंह कैड़ा अस्पताल पहुंचे और पीड़ित को तत्काल 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है, वहीं गीता देवी की बहादुरी की हर ओर चर्चा हो रही है। स्थानीय लोग उसे “पहाड़ की शेरनी” बताते हुए उसकी हिम्मत और साहस एवं सूझबूझ की जमकर सराहना कर रहे हैं। बेटी के इस जज्बे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में पहाड़ की बेटियां किसी से कम नहीं होतीं। बात जब अपने परिवार पर आ जाए तो वह हर परिस्थिति का सामना कर सकती है।
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