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Champawat roadways bus fire: चम्पावत लोहाघाट जा रही बस के इंजन में आग चालक ने टाला हादसा
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champawat roadways bus fire: going lohaghat depot driver saved life uttarakhand breaking news today: टनकपुर–लोहाघाट मार्ग पर फिर टला बड़ा हादसा, खटारा बसों पर सवाल
champawat roadways bus fire: going lohaghat depot driver saved life uttarakhand breaking news today: उत्तराखण्ड रोडवेज की खटारा बसें आए दिन यात्रियों की जान को सांसत में डालती रहती हैं। यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वाली ऐसी ही एक बड़ी खबर आज राज्य के चम्पावत जिले से सामने आ रही है जहां टनकपुर से लोहाघाट की ओर जा रही उत्तराखंड परिवहन निगम की एक बस में गुरुवार को उस समय अचानक चीख-पुकार मच गई, जब चलते वाहन के इंजन से अचानक तेज धुआं उठने लगा।
बेलखेत और अमोड़ी के बीच यह भयावह दृश्य देख बस में सवार चालक परिचालक के साथ ही यात्रियों में भी अफरा-तफरी मच गई। वो तो गनीमत रही कि चालक ने सही समय पर बस रोककर एक बड़ा हादसा टाल दिया अन्यथा संभावित हादसे में जन-धन की हानि होने की आंशका से इंकार नहीं किया जा सकता।
अभी तक मिल रही जानकारी के अनुसार, उत्तराखण्ड परिवहन निगम के लोहाघाट डिपो की रोडवेज बस वाहन संख्या UK07 PA 4304 गुरुवार को टनकपुर से लोहाघाट की ओर जा रही थी। बताया गया है कि घटना के वक्त बस में करीब 15 से 20 यात्री सवार थे। इसी दौरान जैसे ही बस टनकपुर पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल्थी से आगे बेलखेत अमोड़ी के बीच पहुंची तो ड्राइवर को इंजन से धुआं उठता दिखाई दिया, जिस पर चालक और परिचालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत बस को सड़क किनारे रोका और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद इंजन में पानी और रेत डालकर आग लगने की आशंका को समय रहते टाल दिया गया। कुछ ही देर में दूसरी बस की व्यवस्था कर यात्रियों को उनके गंतव्य की ओर रवाना किया गया।
हालांकि, इस घटना ने लोहाघाट डिपो की बसों की स्थिति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पिछले एक महीने के भीतर तीसरी ऐसी घटना है, जिसमें यात्रियों की जान जोखिम में पड़ी। इससे पहले एक जनवरी को देहरादून में लोहाघाट डिपो की ही एक बस में आग लग गई थी, जहां 15-16 यात्रियों की मुश्किल से जान बच सकी। इसके बाद बीते 19 जनवरी को एक अन्य बस के ब्रेक फेल हो गए थे, जिसे दीवार से टकराकर रोका गया।
स्थानीय यात्रियों और लोगों का कहना है कि डिपो में मियाद पूरी कर चुकी बसों का संचालन खुलेआम किया जा रहा है। पर्वतीय मार्गों पर चलने के लिए अनुपयुक्त हो चुकी ये बसें लगातार खराब हो रही हैं, जिससे हर दिन यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। यात्रियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी बसें अब भरोसे का साधन नहीं, बल्कि “चलती मौत” बनती जा रही हैं।
लोगों का आरोप है कि मेंटिनेंस में लापरवाही और नई बसों की कमी के कारण हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने मांग की है कि लोहाघाट डिपो को तत्काल नई बसें उपलब्ध कराई जाएं और खटारा वाहनों को सड़क से हटाया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
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