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Uttarakhand news: dehradun Nishant mainwal join IIT Roorkee for engineering after AIR 2642 in JEE advanced.

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उत्तराखण्ड: पिता लगाते है सब्जी की ठेली, बेटे निशांत का आईआईटी रुड़की में चयन

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Uttarakhand: पिता ने सब्जी का ठेला लगाकर बेटे को पढ़ाया, निशांत ने कड़ी मेहनत से आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) में दाखिला पाकर पिता के सपने को साकार करने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया..

अगर दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो किसी भी मंजिल को आसानी से हासिल किया जा सकता है। इस बात को एक बार फिर सही साबित कर दिखाया है राज्य (Uttarakhand) के देहरादून जिले के रहने वाले निशांत मैनवाल ने। जिन्होंने परिवार की विपरित परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी और अपनी कड़ी मेहनत के बलबूते सुनहरे भविष्य की दास्तां लिखी। इसी का परिणाम है कि निशांत ने आज जेईई-एडवांस में अच्छी रैंक पाई है। अब निशांत न सिर्फ आईआईटी रुड़की(IIT Roorkee) से जियोलॉजिकल टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग करेंगे बल्कि अपने पिता द्वारा देखें ग‌ए सपने को भी साकार करेंगे। बता दें कि निशांत के पिता बबलू मैनवाल सब्जी की ठेली लगाते हैं लेकिन पांचवीं पास बबलू ने इसका असर कभी भी अपने बच्चों की पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया। दिन रात कड़ी मेहनत कर निशांत सहित सभी बच्चों को पढ़ाया, निशांत ने भी अपने पिता की कड़ी मेहनत का इनाम आईआईटी रुड़की में चयनित होकर दिया, जहां से वह अपने पिता का सपना साकार कर बाहर निकलेंगे। अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता, परिजनों एवं गुरूजनों को देने वाले निशांत का सपना अब इंजीनियर बनकर जल्द से जल्द नौकरी शुरू करने का है ताकि वह अपने मेहनतकश पिता को अब आराम दे सके।
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निशांत ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पिता के काम में भी बंटाया हाथ, ऑल इंडिया में 2642वीं रैंक हासिल कर पाया आईआईटी रुड़की में दाखिला:-

प्राप्त जानकारी के अनुसार मूल रूप से राज्य के देहरादून जिले के कैलाशपुर गांव निवासी निशांत मैनवाल का चयन आईआईटी रूड़की में हो गया है। इंटरमीडिएट की परीक्षा में 80 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले निशांत ने एनटीए की जेईई मेन-1 परीक्षा में 90.3 फीसदी अंक हासिल किए जबकि जेईई मेन-2 परीक्षा में उन्हें 89.9 फीसदी अंक मिले और दोनों परीक्षाओं परिणामों में ऑल इंडिया 2642वीं रैंक हासिल की। जिसके फलस्वरूप उन्हें आईआईटी रुड़की में सीट आवंटित हुई। बताते चलें कि निशांत के पिता बबलू पांचवीं पास है, वह घर के पास ही सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बबलू ने दिन रात कड़ी मेहनत की परंतु बच्चों के लिए कभी कोई कमी नहीं होने दी, उनके उज्जवल भविष्य का सुनहरा सपना देखकर उन्हें अच्छी तरह पढ़ाया, इसी का परिणाम है कि निशांत का चयन जहां आईआईटी रुड़की के लिए हो गया है वहीं निशांत का छोटा भाई 12वीं की पढ़ाई कर रहा है जबकि उसकी बड़ी बहन डीएवी से बीएससी कर रही है। बच्चों ने भी पिता की इस कड़ी मेहनत का मान रखा, निशांत ने जहां पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई की वहीं खाली समय में पिता का हाथ भी बंटाया। इस बारे में ऊंची सोच रखने वाले निशांत का कहना है कि कोई भी काम छोटा नही होता।

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