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Uttarakhand news: Pauri Garhwal Naveen patwal gucchi mushroom production
Image : social media ( Naveen patwal gucchi mushroom)

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पौड़ी गढ़वाल के नवीन पटवाल ने किया गुच्छी मशरूम का उत्पादन किमत 40 हजार रूपए किलो

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Naveen patwal gucchi mushroom    : पौड़ी के लाल नवीन पटवाल ने गुच्छी मशरूम का किया उत्पादन, ₹40000 किलो तक है मशरूम की कीमत , लाइफ चेंजर साबित हो सकता है यह मशरूम ….         Naveen patwal gucchi mushroom:   उत्तराखंड में ऐसे कई सारे गांव मौजूद है जहां के लोग रोजगार की तलाश में लगातार अपने घरों को छोड़कर शहरों की ओर रुख कर चुके है। वहीं प्रदेश के कई जिलों में मौजूद गांव आज खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। ऐसा ही कुछ गांव है पौडी जिले का फलदाकोट गांव जहाँ पर किसानों की संख्या 40 है लेकिन इस गांव में अब 20 लोग भी मौजूद नहीं है। जो कहीं ना कहीं गंभीर चिंता का विषय है। लेकिन इसी गांव के नवीन पटवाल ने दुनिया के सबसे महंगे मशरूम गुच्छी मशरूम का कमर्शियल उत्पादन कर एक नया कीर्तिमान रच डाला है। इतना ही नहीं बल्कि इस मशरूम की कीमत 20 से 40000 रुपये के बीच है जिसका उत्पादन करना पहाड़ी लोगों के जीवन मे एक बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके साथ ही रोजगार की तलाश मे पहाड़ से हो रहे पलायन को भी रोक सकता है।

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बता दें पौडी जिले के फलदाकोट गांव के निवासी नवीन पटवाल ने दुनिया के सबसे महंगे मशरूम में से एक गुच्छी मशरूम का कमर्शियल उत्पादन किया है जो देश में पहली बार किया गया है । दरअसल नवीन 18 साल से मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में अपना विशेष योगदान दे रहे हैं इतना ही नहीं बल्कि वह हरिद्वार जिले के रुड़की में हाईटेक प्लांट में मशरूम फार्मिंग भी करते हैं और पिछले तीन साल से मशरूम की खेती का प्रयास करते हुए उन्होंने दो बार असफलता हासिल की लेकिन आखिरकार गुच्छी मशरूम की खेती में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बताते चलें इस मशरूम की कीमत इसके आकार और गुणवत्ता के अनुसार 25 से ₹40000 प्रति किलो तक रहती है जिसके लिए गांव के नेट हाउस में मशरूम खेती की गई है। नवीन का कहना है कि इस मशरूम की खेती से आने वाले समय में बड़ा बदलाव हो सकता है जिससे उन्हें लाखों रुपए की आय प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही लोगों को पलायन करने की जरूरत नहीं होगी। नवीन का कहना है कि गुच्छी मशरूम की पूरी साइकिल 90 दिन में तैयार होती है जिसके लिए उन्होंने 28 दिसंबर 2024 को बीज लगाकर बैग फैलाए थे। जिसमें 100 स्क्वायर मीटर के पॉलीहाउस में करीब 80 किलो ताजा मशरूम की पैदावार हुई जो विश्व का सबसे महंगा चौथा मशरूम है।

ऑनलाइन और होटल में होती है मशरूम की सप्लाई 

नवीन बताते है कि यह मशरूम पहाड़ों से पलायन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है क्योंकि इससे लोगों को अच्छा खासा मुनाफा हो सकता है। इसके साथ ही लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। नवीन ने बताया कि उनकी बात कुछ निर्यातकों से भी चल रही है और यदि कोलैबोरेशन हुआ तो वह इसके उत्पादन को बढ़ावा देकर निर्यात की तरफ बढ़ेंगे। फिलहाल अभी नवीन इस मशरूम को ऑनलाइन के अलावा होटल में इसकी सप्लाई करते हैं। हिमाचल प्रदेश सोलन में स्थित आईसीएआर संस्थान के डायरेक्टरेट ऑफ रिसर्च मशरूम के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर अनिल कुमार ने बताया कि वो गुच्छी मशरूम पर कई सालों से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह मशरूम सबसे महंगा है और बाकी के मशरूम औषधियों से भरपूर होते हैं। आईसीआर के निदेशक डॉक्टर वीपी शर्मा ने बताया कि इस तकनीकी को वो 4 साल पहले से विकसित कर रहे हैं जिसके लिए नवीन उनके यहां आ चुके हैं और चर्चा होने के बाद उन्हें मशरूम के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल हुई।

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