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Uttarakhand teacher news today: Income certificate showing govt teacher's annual salary ₹6,000 jaspur udham Singh Nagar
सांकेतिक फोटो Uttarakhand teacher news

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Uttarakhand news today: उत्तराखण्ड में एक सरकारी शिक्षक की सालाना सैलरी महज 6 हजार

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Uttarakhand teacher news today uttarakhand news today udham Singh Nagar news today uttarakhand teacher salary jaspur news today उत्तराखंड में सरकारी शिक्षक के आय प्रमाण पत्र पर उठे सवाल, 6 लाख से अधिक वेतन के बावजूद 6 हजार वार्षिक आय दिखाने के आरोप की जांच शुरू

Uttarakhand teacher news today: Income certificate showing govt teacher’s annual salary ₹6,000 jaspur udham Singh Nagar उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आ रहा है जहां जसपुर में एक सरकारी शिक्षक के कथित आय प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत मिलने के बाद तहसील प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि सरकारी सेवा में कार्यरत रहते हुए संबंधित शिक्षक ने वर्ष 2013 में अपनी वार्षिक आय महज 6,000 रुपये दर्शाकर आय प्रमाण पत्र बनवाया, जबकि उस समय उनका वास्तविक वार्षिक वेतन छह लाख रुपये से अधिक था। प्रशासन अब यह भी पता लगा रहा है कि इस आय प्रमाण पत्र का उपयोग आखिर किस उद्देश्य से किया गया और क्या इसके माध्यम से किसी सरकारी योजना या अन्य लाभ का फायदा उठाया गया।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच (uttarakhand Income Certificate Investigation)

मामला जसपुर क्षेत्र का है, जहां निवासी रवि दास ने तहसील प्रशासन को लिखित शिकायत देकर पूरे प्रकरण की जांच की मांग की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जसपुर ब्लॉक में कार्यरत एक सरकारी शिक्षक ने वर्ष 2013 में गलत जानकारी के आधार पर आय प्रमाण पत्र बनवाया। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस समय शिक्षक नियमित सरकारी सेवा में थे और उनका वार्षिक वेतन छह लाख रुपये से अधिक था, जबकि प्रमाण पत्र में आय केवल 6,000 रुपये वार्षिक दर्शाई गई।

स्व-घोषणा पत्र में गलत जानकारी देने का आरोप (jaspur udham Singh Nagar news Hindi Self Declaration)

शिकायत के अनुसार, आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रस्तुत किए गए सेल्फ डिक्लेरेशन में संबंधित शिक्षक ने अपनी आय बेहद कम दर्शाई। आरोप है कि यह जानकारी वास्तविक तथ्यों के विपरीत थी और इसी आधार पर आय प्रमाण पत्र जारी कराया गया। अब प्रशासन यह जांच कर रहा है कि आवेदन के समय प्रस्तुत दस्तावेज और स्व-घोषणा पत्र में दी गई जानकारी सही थी या नहीं।

शिक्षा विभाग से मांगी गई सेवा संबंधी जानकारी (uttarakhand teacher news today Education Department)

मामले की जांच के दौरान तहसीलदार की ओर से शिक्षा विभाग से संबंधित शिक्षक की सेवा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया। मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि संबंधित व्यक्ति वर्ष 2013 में परिषदीय विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत था। इस तथ्य के सामने आने के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

अब यह पता लगाया जा रहा है कि प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कहां हुआ (uttarakhand Government teacher salary)

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कम आय दर्शाकर प्राप्त किए गए इस प्रमाण पत्र का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि कहीं इसका इस्तेमाल आरटीई के तहत प्रवेश, किसी सरकारी योजना, छात्रवृत्ति, आर्थिक सहायता या अन्य वित्तीय लाभ लेने के लिए तो नहीं किया गया। यदि प्रमाण पत्र का उपयोग किसी लाभ प्राप्त करने में हुआ है तो उससे जुड़े सभी तथ्यों की भी जांच की जाएगी।

मुख्य शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा? (Uttarakhand news hindi Official Statement)

मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया गया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित व्यक्ति वर्ष 2013 में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत था। उन्होंने कहा कि अब सक्षम स्तर पर यह भी जांच की जा रही है कि आय प्रमाण पत्र का वास्तविक उपयोग किस उद्देश्य से किया गया। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, गलत तथ्य प्रस्तुत करने या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई (uttarakhand news live Administrative Action)

फिलहाल मामला जांच के अधीन है और तहसील प्रशासन सभी संबंधित दस्तावेजों एवं अभिलेखों का परीक्षण कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। यह मामला सरकारी अभिलेखों में दर्ज जानकारी की सत्यता और प्रमाण पत्रों के उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ है।
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