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Uttarakhand wine shop: उत्तराखंड कुमाऊं मंडल में खुलेंगी शराब की 55 नई दुकानें
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Uttarakhand wine shop: 55 new liquor shops will open in Kumaon division: कुमाऊं में शराब दुकानों का बड़ा विस्तार: 55 नई दुकानों की तैयारी, राजस्व बढ़ाने पर सरकार का फोकस
Uttarakhand wine shop: 55 new liquor shops will open in Kumaon division: उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में आबकारी विभाग ने राजस्व बढ़ाने के लक्ष्य के साथ एक बड़ा कदम उठाया है। इस वर्ष देसी और अंग्रेजी शराब की कुल 55 नई दुकानें खोलने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। विभाग अब इन दुकानों के आवंटन के लिए लॉटरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है।
जिलों में बढ़ेगा नेटवर्क, सीमांत तक पहुंचेगी व्यवस्था
प्रस्तावित योजना के अनुसार सबसे ज्यादा 23 दुकानें ऊधमसिंह नगर जिले में खोली जाएंगी। इसके अलावा पिथौरागढ़ में 14, नैनीताल में 8 और चम्पावत में 4 नई दुकानें शुरू की जाएंगी। सीमांत जिलों तक नेटवर्क विस्तार का यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां अब तक कई क्षेत्रों में लाइसेंसी दुकानों की पहुंच सीमित रही है। हालांकि इससे विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है क्योंकि जनभावनाओं के प्रभावित होने से आक्रोश उमड़ सकता है।
राजस्व पर नजर, करोड़ों की उम्मीद
नई दुकानों के संचालन से सरकार को लगभग 60 से 65 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। विभाग इसे वित्तीय लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अहम पहल मान रहा है।
स्थान चयन में नियमों का ध्यान
अधिकारियों का कहना है कि दुकानों के लिए ऐसे स्थान चिन्हित किए जा रहे हैं जहां पार्किंग की पर्याप्त सुविधा हो, ताकि मुख्य सड़कों पर यातायात प्रभावित न हो।
नैनीताल जिले में अंग्रेजी शराब की दुकानों के लिए बजून-कालाढूंगी मार्ग, रामनगर-काशीपुर रोड, ढिकुली-मोहान क्षेत्र और रातीघाट जैसे मार्गों को प्राथमिकता दी गई है। वहीं देसी शराब की दुकानों के लिए गौलापार-चोरगलिया और मालधन रोड जैसे क्षेत्रों का चयन किया गया है।
1 अप्रैल से शुरू हो सकता संचालन
आबकारी विभाग के अनुसार सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इन दुकानों का संचालन एक अप्रैल से शुरू किया जा सकता है। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सभी लाइसेंस आबकारी नियमों के तहत ही जारी किए जाएंगे।
स्थानीय स्तर पर हलचल
नई दुकानों को लेकर जहां विभागीय स्तर पर तैयारी तेज है, वहीं स्थानीय स्तर पर भी इसकी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ क्षेत्रों में इसे रोजगार और सुविधा के रूप में देखा जा रहा है, तो कहीं सामाजिक प्रभाव को लेकर चिंता भी जताई जा रही है।
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