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Uttarakhand news: Buttermilk making machine killed mother and daughter in pokhari chamoli. Pokhari Chamoli News

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उत्तराखंड: छाछ बनाने वाली मशीन ने मां बेटी की ली जान जान, पहाड़ की परंपरागत विधि थी सुरक्षित

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Pokhari Chamoli News: हादसे के वक्त घर में अकेली थी मां बेटी, घटना से परिवार में मचा कोहराम, गांव में पसरा मातम…

21वीं सदी तक आते आते विज्ञान ने बेहद तरक्की कर ली। सच कहें तो आज पहाड़ में भी विज्ञान के इन चमत्कारी आविष्कारों की गूंज सुनाई देने लगी है। इसी का नतीजा है कि पहाड़ के क‌ई परम्परागत चीजों की जगह अब इन वैज्ञानिक (इलेक्ट्रॉनिक) उपकरणों ने ले ली है। हालांकि यह भी सत्य है कि भले ही इन उपकरणों के सहयोग से पहाड़ के वाशिंदों की कठिनाइयां पहले से कम हों गई है परन्तु इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि इन उपकरणों का उपयोग करते समय बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है, अन्यथा क‌ई बार जरा सी चूक जानलेवा साबित हो जाती है। ऐसी ही एक घटना राज्य के चमोली जिले के पोखरी ब्लाक के एक गांव में देखने को मिली है। जहां इलेक्ट्रॉनिक मशीन से छाछ बनाते समय एकाएक करंट लगने से मां बेटी की मौके पर ही मौत हो गई है। आंशका जताई जा रही है कि महिला को करंट लगने के बाद बच्ची अपनी मां के पास गई होगी जिससे उसको भी करंट लग गया होगा।
(Pokhari Chamoli News)
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प्राप्त जानकारी के अनुसार मूल रूप से राज्य के चमोली जिले के पोखरी ब्लाक के गोदी गिवाला गांव निवासी विद्या देवी बीते शुक्रवार को इलेक्ट्रॉनिक मशीन से छाछ बना रही थी। इस दौरान विद्या की 1 वर्षीय मासूम बेटी अदिति पास में ही खेल रही थी। बताया गया है कि इसी दौरान मशीन से एकाएक करंट लगने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक मृतका विद्या अपनी बेटी और सास- ससुर के साथ गांव में ही रहती थी जबकि उसका पति दिल्ली में नौकरी करता है। घटना के वक्त दोनों मां बेटी घर पर अकेली थी। इस दौरान उसके ससुर कुंवर सिंह व सास गांव से कुछ दूर गोशाला गए हुए थे।

एकाएक हुई इस दुखद घटना से परिवार में कोहराम मच गया वहीं पूरे गांव में भी मातम पसर गया। हालांकि ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि घटना के वक्त कोई आसपास होता तो शायद महिला या बच्ची को बचाया जा सकता था। बहरहाल इस दुखद घटना के बाद से तो यही लगता है कि हमारे पहाड़ों में उपयोग होने वाले परंपरागत छाछ बनाने की विधि ही सर्वश्रेष्ठ थी हां मशीनों ने काम जरूर थोड़ा सुलभ किया और समय बचा लिया लेकिन ये खतरे से भी खाली नहीं।
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