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P. S. Bhakuni poem
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कुमाऊंनी कविता- “असोजै तवाई….” पी एस भाकुनी पनदा (काव्य संकलन देवभूमि दर्शन)

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कुमाऊंनी कविता- असोजै तवाई…..P. S. Bhakuni poem
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घर ऐ जाओ असोज लै रौ,
पछिल कौला चाऊं भेज दे ,
खीर खाहूं मन है रौ ।
ऐ जाओ पै असोज लै रौ ।।
तौस लै भौल नी भौय,
म्यर भाटांक तेल निकल गो
और तुम दिल्ली भै रौ ।
ऐ जाओ पै असोज लै रौ ।।
के हुनौछि चारै दिन ऐ जाना ,
घर तुम समाय ल्हिना ,
असोज मी सिमरी ल्हिछी
दङम,आखोङ,ककङ लै खै जाना ,
साग-पात लै खूब हैरौ ।
ऐ जाओ पै असोज लै रौ ।।
मडू लै टिपण है रौ
गाज्यो लै उसिकै छू ,
ईकैलै मी के जै करू
गोठ तौ गोरू ब्यै रौ ।
घर ऐ जाओ असोज लै रौ ।।
रचना- पी एस भाकुनी पनदा, गाँव- खीराकोट, पोस्ट-चनौदा, जनपद- अल्मोड़ा (उतराखण्ड)
P. S. Bhakuni poem

यह भी पढ़ें- गढ़वाली कविता- “नानिया की याद….” ऋतिक पाण्डेय (काव्य संकलन देवभूमि दर्शन)

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