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Goa night club fire uttarakhand: गोवा अग्निकांड में पिथौरागढ़ के सुरेंद्र की भी गई जिंदगी
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Surendra Singh of gurna Pithoragarh died in Goa night club fire incident accident arapora uttarakhand latest news today: गोवा नाइट क्लब हादसे में उत्तराखंड के सुरेंद्र सिंह की मौत, एक हफ्ते पहले ही गए थे नौकरी पर—सपने और संघर्ष राख में बदल गए
Surendra Singh of gurna Pithoragarh died in Goa night club fire incident accident arapora uttarakhand latest news today: नियती कब किस कदर मोड़ ले ली कुछ कहा नहीं जा सकता। वाकई नियती के खेल को समझ पाना आम जनमानस के लिए बिल्कुल असंभव है। नियति के क्रूर खेल की भयावह दास्तां उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ जिले के सुरेंद्र सिंह के साथ भी घटित हुई, जो महज एक हफ्ते पहले ही नौकरी के लिए गोवा के उसी नाइट क्लब में पहुंचे थे जहां शनिवार देर रात हुए भयावह अग्निकांड ने उत्तराखंड के नौ लोगों सहित 25 लोगों की खुशियाँ हमेशा के लिए छीन लीं।
जिनमें पिथौरागढ़ जिले के जमराड़ी सिमली गांव के 38 वर्षीय सुरेंद्र सिंह भी शामिल थे। जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में जुटा सुरेन्द्र अचानक ऐसी आग में समा गया, जिसके बाद पूरा परिवार और गांव गहरे सदमे में है।
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जर्मनी में काम कर चुके थे, दोबारा विदेश जाने की तैयारी—लेकिन किस्मत ने छोड़ दिया साथ
अभी तक मिल रही जानकारी के मुताबिक मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले के गुरना क्षेत्र के जमराड़ी सिमली गांव निवासी सुरेंद्र होटल सेक्टर से लंबे समय से जुड़े हुए थे। उनके पिता अमर सिंह मीडिया को जानकारी देते हुए बताते हैं कि बेटे ने अपना करियर बेंगलुरु से शुरू किया और अपनी लगन से जर्मनी तक पहुंचे। वहां चार वर्षों तक काम करने के बाद वह घर लौटे और दोबारा विदेश जाने की तैयारी में लग गए। हालांकि उनका वीजा आवेदन दस्तावेजों की त्रुटि के कारण रिजेक्ट हो गया, जिसे ठीक कर फिर आवेदन किया, लेकिन प्रक्रिया में समय लग रहा था।
आसपास के शहरों में उनकी योग्यता और अनुभव के अनुरूप वेतन योग्य नौकरी नहीं मिल पा रही थी। इसी बीच उन्हें बेंगलुरु के एक होटल से 50 हजार वेतन का प्रस्ताव मिला, जिस पर वह नौकरी जॉइन करने बंगलुरु चले गए लेकिन महीना खत्म होने पर उन्हें केवल 40 हजार ही सैलरी दी गई। जिस पर वह इस नौकरी से ख़फ़ा होकर दूसरी जगह काम देखने लगे और करीब एक हफ्ते पहले ही गोवा में दूसरी नौकरी ज्वाइन की। जहां ये दर्दनाक हादसा घटित हो गया।
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गांव में मातम, परिवार की हालत खराब—तीन साल पहले हुआ था विवाह
सुरेंद्र के निधन की खबर जैसे ही गांव पहुंची, जमराड़ी सिमली में शोक की लहर फैल गई। सामाजिक कार्यकर्ता ललित सिंह महर कहते हैं कि सुरेंद्र का विवाह तीन वर्ष पहले मनीषा से हुआ था। दंपति की कोई संतान नहीं थी। पति की मौत से बेसुध पत्नी मनीषा बार-बार यही सवाल दोहरा रही हैं— “हमने साथ बैठकर घर बनाने के कितने सपने देखे थे… सुरेंद्र बिना कुछ कहे कैसे चले गए?”
पत्नी मनीषा जहां इस बात पर यकीन नहीं कर पा रही है कि अब पति सुरेंद्र इस दुनिया में नहीं रहे। वहीं उनके माता-पिता का भी रो-रोकर बुरा हाल है। आपको बता दें कि चार भाइयों में सुरेंद्र तीसरे नंबर पर थे। दो भाई टैक्सी संचालन का काम करते हैं, जबकि एक भाई भी होटल सेक्टर में ही कार्यरत है।
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नया घर बनवा रहे थे, मनीषा खुद देख रही थीं काम—सपनों की दीवारें रह गई अधूरी
बताते चलें कि सुरेन्द्र उधमसिंह नगर जिले के खटीमा शहर के महोलिया में नया घर बना रहे थे। एक वर्ष से निर्माण का काम चल रहा था, लेकिन अब तक केवल एक कमरा ही तैयार हो पाया था। बाकी खिड़की-दरवाजों से लेकर अंदरूनी काम तक अधूरा है। सुरेंद्र की गैरमौजूदगी में उनकी पत्नी यही काम देख रही थीं, अब उसी अधूरे मकान की दीवारें उनके लिए असहनीय दर्द का कारण बन गई हैं। बताया गया है कि गोवा में पोस्टमॉर्टम के बाद उनका शव दिल्ली भेजा जा रहा है। परिजनों के अनुसार, शव आज मंगलवार को गांव पहुंचने की उम्मीद है। वहीं रामेश्वर घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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एक और उत्तराखंडी परिवार उजड़ गया—लौट रहे हैं सिर्फ सवाल और दर्द
गोवा हादसे ने एक छोटे पहाड़ी गांव की खुशियाँ उजाड़ दीं। मनीषा का जीवन साथी, माता-पिता का सहारा, भाइयों का हमदर्द और गांव का संघर्षशील युवक अब हमेशा के लिए चला गया। परिवार आज भी यह समझ नहीं पा रहा कि— सुरेंद्र का कसूर क्या था? वैसे यह भी हर पहाड़वासी के लिए अपने आप में बड़ा सवाल है कि क्यों हर बार पहाड़ियों के सपने टूटते हैं? और आखिर कब तक रोजगार की तलाश में जाना उनके लिए जीवन का जोखिम बने रहेगा? गोवा की आग बुझ चुकी है, लेकिन उसके धुएं में घुला यह दर्द लंबे समय तक इस परिवार और गांव के दिलों में जलता रहेगा।
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