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Digvijay Jindwan waiter barkot Uttarkashi success story Neet Exam result
Image : social media ( Digvijay Jindwan Neet Exam)

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बधाई: उत्तरकाशी के दिग्विजय जिन्दवाण ने वेटर की नौकरी करते हुए उत्तीर्ण की NEET परीक्षा

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Digvijay Jindwan Neet Exam: उत्तरकाशी के दिग्विजय जिन्दवाण ने वेटर की नौकरी करते हुए उत्तीर्ण की NEET परीक्षा, विषम परिस्थितियों को दी मात...

Digvijay Jindwan waiter barkot Uttarkashi success story Neet Exam result:उत्तराखंड के होनहार काबिल युवा आज शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं जिसके चलते वो घर की विषम परिस्थितियों के बावजूद भी अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के जरिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर अन्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनते जा रहे हैं। हम आए दिन आपको ऐसे ही होनहार युवाओं से रूबरू करवाते रहते हैं जिन्होंने किसी विशेष क्षेत्र में उपलब्धि हासिल की हो। आज हम आपको उत्तरकाशी जिले के एक कैफे में वेटर की जॉब कर रहे युवक दिग्विजय जिन्दवाण ने रूबरू करवाने वाले हैं जिन्होंने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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अभी तक मिली जानकारी के अनुसार मूल रूप से उत्तरकाशी जिले के बड़कोट तहसील के डख्याट गांव के निवासी दिग्विजय जिन्दवाण ने कैफे में वेटर की नौकरी करने के बावजूद नीट परीक्षा मे विशेष उपलब्धि हासिल की है। दरअसल दिग्विजय ने नौकरी करने के साथ ही नीट परीक्षा के लिए जी तोड़ मेहनत की जिसकी बदौलत उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में अखिल भारतीय स्तर पर 4918 वीं रैंक हासिल की है और अब उनका लक्ष्य बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज में अपना करियर बनाना है। बताते चलें दिग्विजय बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिनके पिता आनंद पाल गांव में भेड़ बकरी पालक का व्यवसाय करते हैं जबकि दिग्विजय की माता कृष्णा देवी गृहणी है। दिग्विजय के दो छोटे भाई हैं जो बोलने और सुनने में अक्षम है जिनमें से एक भाई उत्तरकाशी में ही सब्जी मार्ट में काम करता है जबकि सबसे छोटा भाई वर्तमान में 12वीं का छात्र है।

लंच टाइम मे भी नीट की तैयारी पर दिया जोर

दिग्विजय ने अपनी हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा गांव के ही राजकीय इंटर कॉलेज राजगढ़ी से हासिल की जिसमें उन्होंने हाई स्कूल परीक्षा में 68% और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में 62% अंक हासिल किए हालांकि दिग्विजय की इंटरमीडिएट परीक्षा में एक विषय में बैक आ गई थी जिसके कारण वह नीट परीक्षा के पहले प्रयास में उत्तीर्ण नहीं हो पाए थे। दिग्विजय ने बताया कि इसके बाद उन्होंने 1 साल का गैप कर पढ़ाई की और परिवार की आर्थिक स्थिति को ठीक करने के लिए उन्होंने उत्तरकाशी में रहकर एक कैफे में वेटर से लेकर प्रबंधन तक में हाथ बढ़ाने का निर्णय लिया।

सुबह 9 बजे से रात के 9:00 बजे तक की नौकरी 

इसके लिए वह सुबह 9 बजे से रात के 9:00 बजे तक इस जॉब में दिन के समय लंच टाइम के साथ रात को 9:00 बजे बाद नियमित रूप से नीट परीक्षा की तैयारी में जुटे रहते थे जिसके कारण उन्होंने नीट परीक्षा को पास किया । दिग्विजय ने काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेना भी शुरू कर दिया है ताकि उन्हें अच्छा कॉलेज मिल सके। दिग्विजय की इस विशेष उपलब्धि के बाद से उन्हे लगातार बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

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