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Viral pregnancy news today 38-year-old woman Kusum gave birth to her 10th child in Damoh district Madhya Pradesh:
फोटो सोशल मीडिया Viral pregnancy news today kusum madhya pradesh

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Viral pregnancy news: 38 साल की महिला ने 10वें बच्चे को दिया जन्म, पति बोला ईश्वर का आशीर्वाद

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Viral pregnancy news today 38-year-old woman Kusum gave birth to her 10th child in Damoh district Madhya Pradesh: ‘छोटा परिवार सूखी परिवार’ की सोच के बीच दमोह से आई अलग कहानी, आदिवासी महिला ने दिया 10वीं संतान को जन्म

Viral pregnancy news today 38-year-old woman Kusum gave birth to her 10th child in Damoh district Madhya Pradesh: देश में वर्षों से ‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकारी नीतियों से लेकर सामाजिक अभियानों तक, हर स्तर पर परिवार नियोजन को जरूरी बताया गया। नतीजा यह रहा कि अधिकांश परिवार एक या दो बच्चों तक सीमित हो गए। सरकारी सेवाओं में भी दो से अधिक संतान होने पर नियम और कार्रवाई तक की व्यवस्था की गई। लेकिन 21 वीं सदी के इस डिजिटल युग में मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक बेहद हैरतअंगेज खबर सामने आ रही है जहां 38 साल की एक महिला ने अपने 10वें बच्चे को जन्म दिया है।

इससे जहां महिला अब सुर्खियों का हिस्सा बनी हुई है वहीं परिवार के इस करतब से लोग भी हैरान हैं। इससे भी अधिक हैरानी की बात तो यह है कि महिला ने अपने सभी बच्चे नार्मल डिलीवरी से जन्मे हैं। आज के दौर में जहां लोग पहले बच्चे के जन्म पर ही अस्पतालों के चक्कर काटते रहते हैं वहीं उक्त परिवार पहली बार अस्पताल पहुंचा है वहां भी नार्मल डिलीवरी से महिला ने अपने दसवें बच्चे को जन्म दिया।
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रनेह स्वास्थ्य केंद्र में आदिवासी महिला ने दिया 10वें बच्चे को जन्म madhya pradesh pregnant women news today

प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के दमोह जिले के रनेह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आदिवासी समुदाय की महिला कुसुम आदिवासी ने हाल ही में अपने दसवें बच्चे को जन्म दिया। 38 वर्षीय कुसुम अब सात बेटियों और तीन बेटों की मां हैं। दो दिन पहले जन्मा यह शिशु भी बेटा है। इस असामान्य घटना के बाद महिला और उसका परिवार पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
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18 साल पहले हुई थी शादी, 17 साल का सबसे बड़ा बेटा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुसुम की शादी करीब 18 वर्ष पहले हुई थी। शादी के एक साल बाद उन्होंने पहले बेटे को जन्म दिया, जो अब 17 साल का हो चुका है। इसके बाद समय-समय पर उनके परिवार में आठ और बच्चे जुड़े। खास बात यह है कि अब तक हुई नौ डिलीवरी घर पर सामान्य तरीके से हुई थीं। दसवीं गर्भावस्था के दौरान कुसुम की स्थिति हाई रिस्क में आ गई थी। गांव की आशा कार्यकर्ता लगातार उनकी निगरानी कर रही थी।

हालात बिगड़ने पर उन्हें रनेह के सरकारी अस्पताल लाया गया। यह पहला मौका था जब कुसुम ने अस्पताल में प्रसव किया। जोखिम के बावजूद डॉक्टरों को ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ी और उन्होंने सामान्य प्रसव से 10वीं संतान को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं और किसी तरह का खतरा नहीं बताया गया है।
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आज के दौर में दुर्लभ, इसलिए बना चर्चा का विषय

आज के समय में जब बड़े परिवार दुर्लभ हो चुके हैं, ऐसे में 10 बच्चों की यह कहानी लोगों को हैरान कर रही है। हालांकि कुछ दशक पहले ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में बड़े परिवार आम बात थे, लेकिन समय के साथ परिवार नियोजन ने इस तस्वीर को बदल दिया।
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मजदूर पति ने बच्चों को बताया ईश्वर का आशीर्वाद

कुसुम के पति नंदराम आदिवासी (43 वर्ष) मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वे अपनी संतान को भगवान का आशीर्वाद मानते हैं और कहते हैं कि ये ईश्वर का प्रसाद है, उन्हें जो मिला है, उससे वे संतुष्ट हैं।‌ हालांकि अब जब परिवार में बच्चों की संख्या 10 हो चुकी है, तो नंदराम का कहना है कि आगे बच्चे पैदा नहीं किए जाएंगे और पत्नी का नसबंदी ऑपरेशन जल्द कराया जाएगा। परिवार का सबसे बड़ा 17 वर्षीय बेटा जहां मां और नवजात भाई की देखभाल में जुटा है वहीं बाकी भाई-बहन भी घर में नए सदस्य के आने से खुश हैं। सीमित साधनों के बावजूद परिवार में अपनापन और सहयोग साफ नजर आता है।
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