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Deepa Dimri Milky Mushroom self-employment Karnaprayag chamoli uttarakhand Self employment
Image : social media ( Deepa Dimri Mushroom self-employment)

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चमोली: दीपा डिमरी ने मशरूम को बनाया स्वरोजगार 2 कमरों में उगाकर कर रही लाखों की कमाई

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Deepa Dimri Mushroom self-employment: दीपा डिमरी मशरूम उत्पादन कर सालाना लाखो रुपये की आय कर रही अर्जित, कई जगहो से मिल रहे ऑर्डर...

Deepa Dimri Milky Mushroom self-employment Karnaprayag chamoli uttarakhand Self employment: उत्तराखंड के अधिकांश लोग रोजगार की तलाश में बड़े-बड़े शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं जिसके चलते प्रदेश के कई सारे गांव वर्तमान समय में पलायन की मार झेल रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि रोजगार की तलाश में लगातार गांव के गांव खाली होते जा रहे हैं वहीं कई लोगों के खेत तक बंजर तक पड़ चुके हैं। हालांकि प्रदेश में ऐसे कई सारे लोग मौजूद है जो स्वरोजगार को बढ़ावा देते हुए अपने खेतों मे विभिन्न प्रकार की फसल व सब्जियां उगा रहे हैं जिनसे उन्हे सालाना लाखो रुपये का अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है। ऐसी ही कुछ कहानी है चमोली जिले की दीपा डिमरी की जिन्होंने दो कमरों में मशरूम का उत्पादन कर सालाना लाखों रुपए अर्जित करने का मुकाम हासिल किया है ।

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अभी तक मिली जानकारी के अनुसार चमोली जिले के कर्णप्रयाग की अपर बाजार की निवासी दीपा डिमरी दो कमरों में मशरूम का उत्पादन कर रही है जो अन्य महिलाओं के लिए वाकई में प्रेरणास्रोत है। दरअसल एक समय था जब दीपा को अपने नए काम में नुकसान झेलना पड़ा लेकिन बावजूद इसके उन्होंने कभी हार नहीं मानी और खुद के धैर्य के बलबूते पर आज वह अपने ही घर के दो कमरों में मशरूम उत्पादन कर लाखों रुपए कमा रही है। दीपा बताती है कि शुरुआत में उन्हें मशरूम उत्पादन का कोई अनुभव नहीं था लेकिन उन्होंने मशरूम उत्पादन के लिए पहले प्रशिक्षण लिया और फिर मशरूम उत्पादन की पूरी जानकारी हासिल करते हुए शिताके और मिल्की किस्म के मशरूम उगाना शुरू किया।

एक साल पहले दीपा ने मशरूम उगाने की थी शुरुआत

इतना ही नहीं बल्कि करीब एक साल पहले दीपा ने मशरूम उगाने की शुरुआत की थी जिससे वर्तमान में वो सालाना लाखों रुपए की कमाई कर रही है। आपको जानकारी देते चले मिल्की मशरूम को दूधिया मशरूम भी कहा जाता है ये एक लोकप्रिय और स्वादिष्ट मशरूम होता है जो भारत में व्यापक रूप से उगाया जाता है, यह गर्मी पसंद करने वाली किस्म है और उपोष्णकटिबंधीय और उष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह से उगती। जबकि शिताके मशरूम की खेती के लिए उचित तापमान, उच्च आर्द्रता, अच्छा वेंटिलेशन और एक उपयुक्त सब्सट्रेट की आवश्यकता होती है। शिताके मशरूम को लकड़ी के लॉग या कृत्रिम लॉग पर उगाया जा सकता है और इन्हें 12 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखा जाता है इसे उगाने के लिए धैर्य की आवश्यकता अधिक होती है।

कई जगहो से मिल रहे ऑर्डर

चमोली जिले के अलावा हरिद्वार ऋषिकेश और श्रीनगर तक उन्हें मशरूम के आर्डर मिल रहे हैं। दीपा बताती है कि शुरुआत में उन्हें नुकसान जरूर हुआ लेकिन धैर्य और मेहनत के दम पर उन्होंने मशरूम उत्पादन में सफलता हासिल कर एक नया मुकाम पाया है।

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