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Sitaram yadav martyr: जम्मू-कश्मीर आतंकी मुठभेड़ में सेना के जवान सीताराम यादव शहीद
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Sitaram Yadav martyr : जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना का जवान शहीद, देश में दौड़ी शोक की लहर, परिजनों मे मचा कोहराम
Sitaram Yadav martyr: indian Army soldier of Bihar martyred in Jammu and Kashmir terrorist encounter latest news today : जम्मू कश्मीर से समूचे देशवासियों के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है,जहां पर भारत माता की सेवा करते हुए बिहार के लाल सीताराम यादव ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। बताते चले सीताराम यादव की शहादत के बाद से उनके परिजनों मे कोहराम मचा हुआ है वहीं पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार बिहार के समस्तीपुर जिले के मोरवा हलई थाना क्षेत्र के बाजितपुर करनैल पंचायत के लोदीपुर नारायण गांव के निवासी 40 वर्षीय सीताराम यादव जम्मू कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहादत को प्राप्त हो गए। दरअसल सीताराम यादव इन दिनों जम्मू कश्मीर में तैनात थे ,जो एक आतंकी हमले के बाद चलाए जा रहे ऑपरेशन में शामिल थे। इतना ही नहीं बल्कि आतंकी हमले के बाद चलाए जा रहे ऑपरेशन में वह अग्रिम मोर्चे पर डटे रहे जिन्होंने वहां पर अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। बताते चले सीताराम यादव वर्ष 2002 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे जो लंबे समय से सैन्य अभियानों में भाग ले रहे थे।
बुधवार को पत्नी से वीडियो कॉल पर हुई थी बात
बीते बुधवार को सीताराम यादव की सुबह अपनी पत्नी सुमन राय से ड्यूटी पर जाने के दौरान वीडियो कॉल पर बात हुई थी। इसके बाद सुबह 11:00 सीताराम की पत्नी को आर्मी यूनिट से फोन आया कि उन्हें गोली लग गई है लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है वह ठीक हो जाएंगे। मगर कुछ देर बाद फोन पर सीताराम के शहीद होने की सूचना उनकी पत्नी को मिली। पति के शहादत की खबर सुनते ही सुमन को गहरा सदमा लगा।
शहीद के पिता बोले ठेला चला कर बेटे को पढ़ाया था
शहीद के पिता सूरज राय ने बताया कि हमने बहुत गरीबी में बच्चों को पढ़ाया था ,मैंने कोलकाता में ठेला चलाने का काम किया। मैं नहीं चाहता था कि बच्चे कभी दुःखी रहे इसलिए हमेशा उन्होंने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सूरज राय यादव ने अपने बच्चों को यह तक नहीं बताया कि वह क्या करते हैं और कैसे- पैसे कमाते हैं। सीताराम का गांव के ही सरकारी स्कूल में उनके पिता ने एडमिशन कराया था ,जहां से प्राइमरी और हाई स्कूल की पढ़ाई करने के बाद वह पटौदी कॉलेज पहुंचे जहां से उन्होंने इंटर की पढ़ाई की। इसके बाद उनका सिलेक्शन सेना में हुआ व बाद के दिनों में डिस्टेंस से उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जिसके बाद उन्हें प्रमोशन मिला और वह हवलदार बन गए थे।
अप्रैल में घर आने वाले थे सीताराम यादव
शहीद जवान के छोटे भाई शिवानंद राय ने बताया कि उन्हें बुधवार की रात 11:00 भाई के शहीद होने की जानकारी मिली। वो साढू के बेटे की शादी मे आए थे ,जो 15 दिन पहले ही यहां से गए थे और अप्रैल में घर आने वाले थे। उनके आने पर बहुत सारे काम करने थे लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
शहीद के तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
शहीद के दो बेटे और एक बेटी है जिसमें बड़ा बेटा अनुज गांव में रह रहा है जो दोनों पैरों से विकलांग है। बताते चले आज शुक्रवार को शहीद का पार्थिव शरीर उनके आवास पहुँच चुका है जिसके बाद उन्हे पैतृक घाट पर पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जायेगी। सीताराम की शहादत के बाद से उनके माता-पिता समेत पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
