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Uttarakhand news: Chamoli Tharali Pregnant Woman Sarita Devi and Unborn Baby Die Delay in Referral
Image: social media (Chamoli pregnant women Sarita Devi case)

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उत्तराखण्ड चमोली

Uttarakhand: चमोली के थराली में प्रसव के दौरान मां और गर्भस्थ शिशु की मौत उठे कई सवाल

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Chamoli Tharali Pregnant Woman Sarita Devi Death News:
चमोली में प्रसव के दौरान लापरवाही का आरोप, रेफर में देरी से गर्भवती और गर्भस्थ शिशु की मौत

|Chamoli Tharali Pregnant Woman Sarita Devi Death News| Uttarakhand news| उत्तराखंड के चमोली जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। थराली क्षेत्र के कुराड़ गांव निवासी 35 वर्षीय सरिता देवी, पत्नी नरेंद्र कुमार, की प्रसव पीड़ा के दौरान इलाज में कथित देरी के कारण मौत हो गई। सबसे दुखद बात यह रही कि सरिता देवी के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की भी जान नहीं बच सकी। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर समय पर हायर सेंटर रेफर न करने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

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प्रसव पीड़ा होने पर पैदल पहुंचीं अस्पताल
(Chamoli Pregnant Woman Death News)

सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे सरिता देवी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव से वह खुद पैदल चलकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली पहुंचीं। सुबह 9:30 बजे अस्पताल में उनकी पर्ची बनाई गई। जांच के बाद डॉ. अमित रुद्र ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि स्थिति सामान्य है और अस्पताल में ही सुरक्षित सामान्य प्रसव कराया जाएगा। यह सरिता देवी का तीसरा प्रसव था।

पांच घंटे तक चलता रहा प्रयास, बिगड़ती गई हालत

सुबह 11 बजे से दोपहर करीब 2 बजे तक अस्पताल में सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया जाता रहा। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही। दोपहर करीब 2 बजे पानी की थैली (वॉटर बैग) फट गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार डॉक्टरों से महिला को तुरंत हायर सेंटर रेफर करने की गुहार लगाई, लेकिन डॉक्टर लगातार यही कहते रहे कि डिलीवरी थराली अस्पताल में ही हो जाएगी। उनका आरोप है कि मरीज को जरूरत से ज्यादा देर तक अस्पताल में रोके रखा गया।

देरी से रेफर, रास्ते में चली गई दो जिंदगियां
(Pregnant Woman Death During Referral)

दोपहर करीब 2:30 बजे जब महिला की हालत पूरी तरह गंभीर हो गई, तब उसे 108 एम्बुलेंस के जरिए उप जिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग रेफर किया गया। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी।प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय गुप्ता के अनुसार, सीएचसी थराली में स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोकोलॉजिस्ट) उपलब्ध नहीं थीं, इसलिए मरीज को कर्णप्रयाग भेजा गया।लेकिन थराली से कर्णप्रयाग ले जाते समय नारायणबगड़ के पास रास्ते में ही सरिता देवी ने दम तोड़ दिया। उनके साथ गर्भ में पल रहे शिशु की भी मौत हो गई। कर्णप्रयाग अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।

मॉर्चरी की बदहाली पर भी उठे सवाल

घटना के बाद जब शव को कर्णप्रयाग अस्पताल की मॉर्चरी में रखा गया, तब एक और गंभीर मामला सामने आया। मृतका के भाई का आरोप है कि शवगृह के डीप फ्रीजर में कीड़े पड़े हुए थे और उसी अस्वच्छ फ्रीजर में शव रखा गया। उन्होंने दावा किया कि इसका वीडियो साक्ष्य भी उनके पास मौजूद है। इस घटना से परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी फैल गई।

पुलिस और प्रशासन पर भी लगाए गंभीर आरोप
(Chamoli Health Department)

मृतका के भाई का आरोप है कि उन्होंने पूरी रात पुलिस को 10 से 15 बार फोन किया, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उनका यह भी कहना है कि 108 एम्बुलेंस कर्मियों द्वारा मेडिकल और डिलीवरी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज सीधे पुलिस को सौंप दिए गए, लेकिन उनकी प्रति परिजनों को उपलब्ध नहीं कराई गई।

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दो मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया
(Uttarakhand Health News)

सरिता देवी अपने पीछे दो छोटे बच्चों को छोड़ गई हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य भास्कर पांडे समेत कई स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते महिला को हायर सेंटर भेज दिया जाता, तो संभवतः मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती थी।

जांच के आदेश, कार्रवाई का भरोसा
(Health Department Investigation)

कोतवाली प्रभारी विनोद थपलियाल ने बताया कि शव का पंचनामा भरने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।वहीं, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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