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Uttarakhand news live: Before Becoming a Captain, Uttarakhand Almora Martyr Bireshwar Goswami Prediction
Image : social media ( Uttarakhand News Live)

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ALMORA NEWS देहरादून

Uttarakhand: राजौरी में शहीद हुए अल्मोड़ा के लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की भविष्यवाणी हुई सच….

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शहीद बीरेश्वर नाथ गोस्वामी की भविष्यवाणी बनी हकीकत पूरे क्षेत्र में दौड़ी शोक की लहर- Indian Army Martyr Bireshwar Goswami Story| Uttarakhand News Live|

|Indian Army Martyr Bireshwar Goswami Story| Uttarakhand News Live|“कक्षा 9 में एक किशोर ने सोशल मीडिया पर लिखा था—’26 साल की उम्र में मैं तिरंगे में लिपटकर घर लौटूंगा।’ उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह बात एक दिन सच साबित हो जाएगी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस दिन प्रमोशन होकर उनके कंधों पर कैप्टन के सितारे सजने वाले थे, उससे ठीक पहले वह तिरंगे में लिपटकर अपने घर लौटे। यह कहानी है उत्तराखंड के वीर सपूत लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की, जिन्होंने देश सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

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(राजौरी ऑपरेशन में शहादत – Indian Army Operation News)

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उत्तराखंड के वीर सपूत लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी शहादत को प्राप्त हो गए, लेकिन उनकी शहादत की कहानी जितनी गर्व से भरी है, उतनी ही भावुक कर देने वाली भी है।

(मां के आंसू और परिवार का दर्द – Emotional Army Martyr Story)

अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट के बग्वालीपोखर क्षेत्र के मूल निवासी और वर्तमान में पांडेखोला निवासी 25 वर्षीय लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का पार्थिव शरीर रविवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके गृह क्षेत्र पांडेखोला पहुंचा। बेटे को अंतिम बार ताबुत में लिपटा देखकर मां सरस्वती गोस्वामी की आंखों से आंसुओं का सैलाब फूट पड़ा। वे बार-बार सिर्फ एक ही बात कहती रहीं—”शाबाश बेटा… शाबाश बेटा…” और कुछ ही देर में बेसुध हो गईं। पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी, जो भनौली तहसील में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, अपने जवान बेटे को खोने के दुख से टूट चुके हैं। बड़े भाई अमित गोस्वामी के आंसू भी नहीं थम रहे थे। वहीं 83 वर्षीय दादी नंदी देवी अपने पोते की शहादत के गम में बेसुध थीं। बताते चलें कि शहीद बीरेश्वर की मां सरस्वती गोस्वामी वलसा में प्रधानाध्यापिका के पद पर तैनात हैं।

(9वीं कक्षा की पोस्ट ने सबको रुलाया – Viral Social Media Post)

इस दौरान पिता ने एक ऐसी बात साझा की जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि बीरेश्वर ने 9वीं कक्षा में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि 26 साल की उम्र में वह तिरंगे में लिपटकर घर लौटेंगे। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह बात एक दिन सच साबित हो जाएगी।

(संघर्ष से सेना तक का सफर – Success Story Indian Army Officer)

आपको बता दें कि शहीद बीरेश्वर ने आर्मी पब्लिक स्कूल रानीखेत और सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही उनका लक्ष्य भारतीय सेना में अधिकारी बनना था। देश सेवा के इसी जुनून में उन्होंने विदेश में पढ़ाई और करियर के अवसरों तक को ठुकरा दिया। कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद उन्होंने संयुक्त रक्षा सेवा यानी सीडीएस परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 11वीं रैंक हासिल की। 9 जनवरी 2023 को उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में प्रशिक्षण शुरू किया और जून 2024 में पास आउट होकर भारतीय सेना की 5 असम रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया। उनके पासिंग आउट परेड की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है जो उनके माता-पिता के साथ है।

(ऑपरेशन शेरावाली में क्या हुआ – Counter Terror Operation)

आपको बता दें कि इन दिनों उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में थी। महज चार दिन पहले ही वे ‘ऑपरेशन शेरावाली’ का हिस्सा बने थे। सेना के अनुसार 6 जून की शाम राजौरी जिले में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया जा रहा था। लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी तलाशी दल का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में उनका पैर फिसल गया और वे गहरी खाई में गिर गए। साथी जवानों ने तत्काल बचाव अभियान चलाकर उन्हें सेना के 150 जनरल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

(कैप्टन बनने से पहले शहादत – Promotion Before Martyrdom)

बीरेश्वर की शहादत इसलिए भी पूरे देश को भावुक कर रही है क्योंकि 8 जून को उनका प्रमोशन होने वाला था। दो साल की सफल सैन्य सेवा पूरी करने के बाद उन्हें लेफ्टिनेंट से कैप्टन बनाया जाना था। बटालियन में जश्न का माहौल था। नए पद के स्टार्स, मेडल और प्रतीक चिह्न भी मुख्यालय से पहुंच चुके थे। साथी अधिकारी और जवान इस विशेष दिन की तैयारियों में जुटे थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जिन कंधों पर अगले दिन कैप्टन के सितारे सजने थे, उसी वीर अधिकारी को एक दिन पहले तिरंगे में लिपटकर अंतिम विदाई दी गई।

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(अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब – Last Tribute To Army Officer)

रविवार शाम अल्मोड़ा के विश्वनाथ घाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके भाई अमित गोस्वामी और चाचा कैलाश गोस्वामी ने मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के दौरान हजारों लोगों ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की।

(देश हमेशा करेगा याद – Indian Army Hero)

लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, समर्पण और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उत्तराखंड की वीरभूमि ने एक और बहादुर बेटे को खोया है, लेकिन देश को उन पर हमेशा गर्व रहेगा।

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